सावधान! नेता हों या आम जनता, सबको शिकार बना रहा Deepfake, साइबर एक्सपर्ट से जानें बचने का तरीका
डीपफेक तकनीक के जरिए प्रभावशाली लोगों को हनीट्रैप और जबरन वसूली का शिकार बनाया जा रहा है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती है. साइबर एक्सपर्ट के अनुसार, सतर्कता, अनजान लिंक्स से परहेज और त्वरित कानूनी कार्रवाई ही इस डिजिटल खतरे से बचने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है.

डिजिटल युग में एआई तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर ठगों के हाथ में 'डीपफेक' (Deepfake) जैसा एक घातक हथियार भी थमा दिया है . राजस्थान सहित पूरे देश में डीपफेक के जरिए लोगों की छवि खराब करने और उनसे पैसे वसूलने (Extortion) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं . राजस्थान तक से खास बातचीत में साइबर एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत ने बताया कि कैसे यह तकनीक नेताओं, डॉक्टरों और प्रभावशाली लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है.
क्या है डीपफेक और कैसे बनाया जाता है?
डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें एआई टूल्स का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति के चेहरे को किसी दूसरे वीडियो या फोटो पर बड़ी सटीकता से लगाया जा सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार आजकल कॉलेज जाने वाले बच्चे भी फ्री एआई टूल्स और प्रॉम्ट्स की मदद से महज कुछ मिनटों में किसी का भी अश्लील वीडियो तैयार कर सकते हैं.
प्रतिष्ठित लोग हैं आसान टारगेट
साइबर एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत ने खुलासा किया कि ठग अक्सर उन लोगों को निशाना बनाते हैं जिनकी समाज में प्रतिष्ठा है, जैसे नेता, डॉक्टर, एडवोकेट या इन्फ्लुएंसर्स. ठगों को पता होता है कि अपनी छवि बचाने के लिए ये लोग आसानी से लाखों रुपये दे देंगे. राजस्थान में हाल ही में एक महिला निर्दलीय विधायक के साथ भी ऐसी घटना सामने आई थी.
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असली और नकली की पहचान कैसे करें?
एक आम इंसान अपनी आंखों से डीपफेक वीडियो को नहीं पहचान सकता. हालांकि, एक्सपर्ट्स के लिए इसकी पहचान करना मुश्किल नहीं है. अंकुर चंद्रकांत के मुताबिक, कुछ सॉफ्टवेयर और टूल्स की मदद से 20 मिनट के भीतर वीडियो की असलियत का पता लगाया जा सकता है.
कई बार लोग अपनी असली फोटो या वीडियो लीक होने पर भी उसे 'डीपफेक' बताकर नकारने की कोशिश करते हैं, जो पुलिस और एक्सपर्ट्स के लिए एक नई चुनौती बन गई है.
साइबर अटैक से बचने के गोल्ड टिप्स:
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल में आए लिंक पर क्लिक करने से बचें .
- APK फाइल्स से रहें सावधान: त्योहारों या ऑफर्स के नाम पर आने वाली एपीके फाइल्स (APK Files) को कभी डाउनलोड न करें .
- तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आप शिकार होते हैं, तो बदनामी के डर से पैसे देने के बजाय तुरंत साइबर सेल या एक्सपर्ट से संपर्क करें .
- स्टेटमेंट जारी करें: वायरल होने से पहले ही स्पष्ट कर दें कि वीडियो फेक है .
- पर्सनल मोमेंट्स रिकॉर्ड न करें: फोन कभी भी ठीक कराने दें या किसी को इस्तेमाल के लिए दें, तो डेटा एक्सेस का खतरा हमेशा बना रहता है.
- एक्सपर्ट की सलाह: साइबर जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है. यदि आप जागरूक हैं, तो 90% मामलों में हैकर आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
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