गदरपुर: अतिक्रमण नोटिस के बाद अरविंद पांडे का शक्ति प्रदर्शन, लेकिन BJP के इन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई सियासी हलचल
उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. यहां गदरपुर विधायक अरविंद पांडे पर जमीन कब्जाने के आरोप लगे हैं. इस बीच प्रशासन ने उनके कैंप कार्यालय पर अतिक्रमण नोटिस चस्पा कर दिया है. वहीं, गुरुवार को अरविंद ने अपने समर्थन में एक सभा बुलाई. यहां भारी भीड़ तो जुटी लेकिन BJP के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

Arvind Pandey Gadarpur MLA controversy: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची है. इस बार केंद्र में हैं गदरपुर से सत्ताधारी विधायक अरविंद पांडे. दरअसल, बीते कुछ समय से अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले विधायक पांडे अब खुद विवादों में घिर गए हैं. काशीपुर के सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाने के बाद उन पर जमीन कब्जाने के गंभीर आरोप लगे हैं. स्थिति तब और गंभीर हो गई जब प्रशासन ने उनके कैंप कार्यालय पर अतिक्रमण का नोटिस चिपका दिया और 15 दिनों में खाली करने का आदेश दे दिया.
विधायक अरविंद पांडे के समर्थन में गुरुवार उनके आवास पर एक बड़ी महासभा का आयोजन होना था. इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, पौड़ी सांसद अनिल बलूनी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक जैसे दिग्गज नेताओं का शामिल होना था. सुबह से ही कार्यकर्ता भारी भीड़ के साथ वहां डटे रहे. लेकिन शाम होते होते इन बड़े नेताओं का दौरा अचानक रद्द हो गया. राजनीतिक गलियारों में इस कैंसिलेशन को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
न्याय के लिए सुखवंत सिंह के परिवार के साथ खड़े
इस दौरान सभा में विधायक अरविंद पांडे ने अपनी बात मजबूती से रखी. उन्होंने कहा कि सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले जो वीडियो बनाया था वो बेहद भावुक करने वाला है. हालांकि परिवार अभी SIT की जांच और सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट है. लेकिन अगर भविष्य में उन्हें लगा कि न्याय नहीं मिल रहा तो वो परिवार के साथ खड़े रहेंगे. विधायक ने कहा कि सरकार का हिस्सा हैं लेकिन यदि कुछ अधिकारियों की गलत नीतियों के कारण सरकार की छवि खराब होती है तो उसके खिलाफ आवाज उठाना उनकी जिम्मेदारी है.
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खुद पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच की चुनौती
वहीं, जमीन कब्जाने और भूमाफिया जैसे आरोपों पर पलटवार करते हुए अरविंद पांडे ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से निवेदन किया कि यदि किसी जनप्रतिनिधि पर इतने सारे आरोप लगते हैं तो स्वतः संज्ञान लेकर सीबीआई जांच करानी चाहिए. विधायक ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह सीबीआई जांच में दोषी पाए जाते हैंतो इससे राजनीति में भ्रष्ट नेताओं का अंत होगा. लेकिन अगर आरोप झूठे हैं तो साजिश रचने वाले बेनकाब होंगे.
'सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि गलत व्यवस्था के खिलाफ हैं'
मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद पांडे ने कहा कि अगर घर का मुखिया कुछ गलत कर रहा हो और उसका परिणाम भविष्य में बुरा होने वाला हो तो उन्हें रोकना परिवार के खिलाफ जाना नहीं कहलाता. उन्होंने दोहराया कि वो सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि गलत व्यवस्था के खिलाफ हैं. फिलहाल गुरुवार को हुई सभा में भारी जनसैलाब के बीच विधायक ने अपनी ताकत तो दिखाई है लेकिन भाजपा के बड़े नेताओं की दूरी कई सवाल छोड़ गई है.
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