अचानक दिल्ली बीजेपी ऑफिस पहुंचे भोजपुरी पावरस्टार पवन सिंह, क्या राज्यसभा का रास्ता हो गया साफ?
Pawan Singh Rajya Sabha: भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की दिल्ली में बीजेपी केंद्रीय कार्यालय मौजूदगी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज में शामिल होकर मंच से गाना सुनाने वाले पवन सिंह की इस सक्रियता को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

Pawan Singh Delhi Visit: भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज कलाकार पवन सिंह एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में हैं. दरअसल, मकर संक्रांति के मौके पर पवन सिंह दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे. अब यहां आयोजित दही-चूड़ा भोज में उनकी मौजूदगी ने बिहार से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. ऐसे में अब उनकी इस सक्रियता को आगामी राज्यसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में अब ये कयास लगाए जा रहें हैं कि क्या ये सिर्फ मुलाकात है या बिहार की राजनीति में कोई बड़ा गेम सेट होने वाला है?
बीजेपी कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पवन सिंह का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. उन्होंने मंच संभाला और बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हिट हुए अपने गाने जोड़ी मोदी और नीतीश के हिट हो जाई की पंक्तियां सुनाई. इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया. पवन सिंह ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि इस मंच पर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है.
राज्यसभा जाने की अटकलें हुई तेज
पवन सिंह की इस दिल्ली यात्रा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके राज्यसभा जाने को लेकर हो रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में पवन सिंह ने बीजेपी और एनडीए गठबंधन के लिए स्टार प्रचारक के रूप में कड़ी मेहनत की थी. चुनाव के दौरान उनके गानों और रैलियों ने मतदाताओं को गोलबंद करने में बड़ी भूमिका निभाई. माना जा रहा है कि पार्टी उनके इसी समर्पण और जमीनी पकड़ का इनाम उन्हें राज्यसभा की सीट के रूप में दे सकती है.
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बीजेपी और पवन सिंह के बढ़ते रिश्ते
हालांकि, पवन सिंह ने मीडिया से बातचीत में राज्यसभा को लेकर कोई सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने केवल मकर संक्रांति की बधाई दी और दही चूड़ा भोज का आनंद लेने की बात कही. लेकिन हकीकत ये है कि चुनाव के दौरान बीजेपी में घर वापसी करने के बाद से पवन सिंह की पार्टी में अहमियत लगातार बढ़ रही है. बीजेपी नेतृत्व के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि पार्टी उन्हें केवल एक प्रचारक नहीं बल्कि एक बड़े चेहरे के तौर पर स्थापित करना चाहती है.
नई जिम्मेदारी का इंतजार
अब सबकी नजरें बीजेपी के अगले कदम पर टिकी हैं. क्या पार्टी वास्तव में पवन सिंह को उच्च सदन भेजकर भोजपुरी बेल्ट में अपनी पकड़ और मजबूत करेगी या फिर पवन सिंह एक सिपाही के तौर पर संगठन के लिए काम करते रहेंगे? फिलहाल पवन सिंह के इस दिल्ली दौरे ने विपक्षी खेमे में भी बेचैनी बढ़ा दी है और बिहार की राजनीति में उनके अगले कदम का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है.
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