छत्तीसगढ़: जहां गूंजती थीं गोलियां, अब बनेंगे स्कूल-अस्पताल, बाड़ेसट्टी बना पहला नक्सल-फ्री गांव, सरकार देगी 1 करोड़ रुपये
Chhattisgarh: सुकमा जिले का बाड़ेसट्टी गांव नक्सल-मुक्त घोषित होकर छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा ग्राम पंचायत बन गया है और सरकार ने विकास कार्यों के लिए उसे 1 करोड़ रुपये दिए हैं.

Chhattisgarh News: जंगलों और नक्सल हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले सुकमा जिले का छोटा सा गांव बाड़ेसट्टी अब पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गया है. जिस गांव में कुछ साल पहले तक डर के साए में जिंदगी चलती थी वहां आज शांति है. दरअसल इलवाड़ पंचायत योजना के तहत बाड़ेसट्टी को छत्तीसगढ़ का पहला नक्सल फ्री ग्राम पंचायत घोषित किया गया है.
सरकार ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए गांव को 1 करोड़ रुपये की विशेष राशि भी दी है. यह पैसा उन गांवों को मिलता है जो पूरी तरह नक्सल प्रभाव से मुक्त हो जाते हैं ताकि वहां स्कूल, अस्पताल, सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं को मजबूत किया जा सके.
क्या मिलेगा इस 1 करोड़ से?
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज के मुताबिक इलवाड़ पंचायत योजना के तहत नक्सल-मुक्त ग्राम पंचायतों में बिजली, राशन दुकान, स्कूल, अस्पताल और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जाती हैं. उन्होंने बताया कि बाड़ेसट्टी इस योजना में राज्य का पहला गांव है और यहां विकास के काम लगातार आगे बढ़ रहे हैं. उनका मानना है कि यह गांव अब आसपास के इलाकों के लिए भी प्रेरणा बनेगा.
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80% से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं योजनाओं से
सुकमा जिला पंचायत के सीईओ मुकुंद ठाकुर कहते हैं कि बाड़ेसट्टी का नक्सल-मुक्त होना जिले और पूरे राज्य के लिए ऐतिहासिक पल है. अलग-अलग सरकारी विभागों ने मिलकर ग्रामीणों को स्वच्छ भारत मिशन, स्वयं सहायता समूह और मनरेगा जैसी योजनाओं से जोड़ा है. कई योजनाओं में 80 प्रतिशत से ज्यादा पात्र लोगों को लाभ मिल चुका है.
मॉडल पंचायत बनाने की तैयारी
आगे की योजना और भी बड़ी है. बाड़ेसट्टी को एक आदर्श पंचायत के रूप में तैयार किया जाएगा. इसके तहत नए पंचायत भवन, पुल-पुलिया, आंगनबाड़ी केंद्र, सड़कें और अन्य जरूरी ढांचागत काम किए जाएंगे ताकि गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल सके.
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