Charchit Chehra: कौन हैं दिल्ली दंगे का मुख्य आरोपी उमर खालिद, जिसे आज भी कई लोग मानते हैं अपना हीरो?
Who is Umar Khalid: कौन हैं दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी उमर खालिद, जिन पर UAPA के तहत केस दर्ज है और जो 5 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं. JNU विवाद से लेकर 2020 दिल्ली दंगे, सुप्रीम कोर्ट की जमानत पर रोक, अमेरिका तक उठी आवाज और न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के समर्थन तक, चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए उमर खालिद की पूरी कहानी.

Delhi Riots Case Latest Updates: 'मेरा नाम उमर खालिद जरूर है, लेकिन मैं आतंकी नहीं हूं...', ये बोल उमर खालिद ने अपनी सफाई देते हुए तब कहे थे जब साल 2016 में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारा देने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था. उसी दौर में कन्हैया कुमार भी वायरल हुए थे. तभी से बीजेपी ने उन लोगों को टुकड़े-टुकड़े गैंग कहना शुरू कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक इनकी विचारधारा देश के खिलाफ जाती दिखी. उसी दौर में एकदम से उमर खालिद का नाम चमका. उमर दिल्ली यूनिवर्सिटी से बैचलर, JNU से मास्टर्स, एम फिल और पीएचडी की डिग्री हासिल कर चुके हैं.
2016 से 2025 हो गया उमर खालिद का नाम आज भी चर्चा में है. हालांकि जिस मामले के चलते वो चर्चा में वो साल 2020 का है, जब CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क गई थी, तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे. और इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उमर खालिद पर बड़ा फैसला सुनाया है.
चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे कौन हैं उमर खालिद, क्या है जेएनयू और दिल्ली दंगों का वो केस जिसमें फंसे उमर खालिद और क्यों न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी कर रहे उमर खालिद की बात...
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उमर खालिद को नहीं मिली राहत
उमर खालिद पर जो आरोप लगे वो छोटे-मोटे आरोप नहीं UAPA के तहत केस लगे हुए है. 5 साल से ज्यादा हुए इस केस में न ट्रायल शुरू हुआ, न जमानत मिली...उमर खालिद जेल में बंद हैं और अगले एक साल के लिए जमानत के लिए अर्जी भी नहीं लगा सकते. दिल्ली हाइकोर्ट में हारने के बाद उमर सुप्रीम कोर्ट इस आस में आए थे कि शायद सुनवाई हो लेकिन यहां भी राहत नहीं मिली. उमर खालिद जितना चर्चित नाम है, उतना ही विवादित भी. एक वर्ग के लिए वो हीरो हैं, दूसरे के लिए विलेन.
एक वर्ग के लिए उमर खालिद एक पढ़े-लिखे छात्र और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं तो दूसरे की नजर में देशविरोधी, गद्दार, और न जाने क्या, क्या. उमर का नाम लंबे समय से कई विवादों और आरोपों से भी जुड़ा रहा है. जहां एक ओर उनके आलोचक उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों से जोड़ते हैं, वहीं उनके समर्थक उन्हें विचार रखने की आजादी का पक्षधर मानते हैं.
कौन हैं उमर खालिद?
उमर खालिद का परिवार करीब तीन दशक पहले महाराष्ट्र के अमरावती जिले के तालेगांव से दिल्ली आकर बस गया था. उनका परिवार दिल्ली के जाकिरनगर इलाके में रहता है, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि उमर को वहां बहुत कम देखा गया है. उमर खालिद के पिता का नाम सैयद कासिम रसूल इलियास है. वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं, जानकारी के मुताबिक वो पहले स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी SIMI से जुड़े थे और बाद में वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने. इसके अलावा, वो एक उर्दू मैगजीन अफकार-ए-मिल्ली से भी जुड़े रहे हैं.
उमर खालिद का जन्म दिल्ली में हुआ, उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने हिस्ट्री में एमए, एमफिल किया और बाद में पीएचडी में दाखिला लिया. पढ़ाई के साथ-साथ उमर खालिद की रुचि छात्र राजनीति और सामाजिक मुद्दों में रही. वे डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े रहे हैं. 2016 के बाद भी उमर खालिद समय-समय पर खबरों में बने रहे. उन्होंने कई बार केंद्र सरकार और तत्कालीन नीतियों की आलोचना की. 2018 के भीमा-कोरेगांव मामले में भी एक FIR में उनका नाम सामने आया, जिसमें आरोप था कि उनके भाषण से सामाजिक तनाव बढ़ा. इसी साल दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में उन पर फायरिंग हुई हालांकि वो सुरक्षित बच गए.
अमेरिका तक गूंजी उमर के लिए गूंज
2020 से उमर खालिद को जमानत नहीं मिलना बहुत बड़ा विवाद बनता रहा है. इस बीच जितने चीफ जस्टिस हुए उनको रिटायरमेंट के बाद इस सवाल का सामना करना पड़ा कि उमर खालिद, शरजील इमाम को आजतक जमानत क्यों नहीं मिली. गूंज अमेरिका तक रही कि उमर खालिद ने गुनाह किया या नहीं, ये तो साबित नहीं हुआ लेकिन जमानत तक नहीं मिल रही. उमर खालिद के मामले को लेकर 8 अमेरिकी सांसदों ने वॉशिंगटन स्थित भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद को जमानत देने और निष्पक्ष और समयबद्ध सुनवाई की मांग की थी. इस पहल में कई प्रमुख डेमोक्रेट सांसद शामिल थे.
जोहरान ममदानी ने लेटर में क्या लिखा?
न्यू यॉर्क के नए नवेले मेयर जोहरान ममदानी ने भी 2023 में एक कार्यक्रम के दौरान उमर खालिद के जेल से लिखे लेटर की कुछ लाइन्स पढ़ी थी. ममदानी ने उस समय वो चिट्ठी पढ़ते हुए इस बात पर जोर दिया था कि उमर खालिद को बिना मुकदमे के लंबी अवधि तक हिरासत में रखना न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना है. जोहरान के 1 जनवरी को मेयर पद की शपथ लेने के बाद हुए हाल ही में ममदानी की उमर खालिद को लिखा हैंडरिटन लेटर सामने आया, जिसे उमर की पार्टनर बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने एक्स पर शेयर किया था, जिसमें जोहरान उमर के लिए लिखते हैं-
'Dear Umar, I think of your words on bitterness often, and the Importance of not letting it consume one's self. It was a pleasure to meet your parents. We are all thinking of you.'
इसे हिंदी में अनुवाद करें तो, 'मैं अक्सर तुम्हारे उन शब्दों को याद करता हूं जिनमें तुमने कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही थी. तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई, हमें तुम्हारी चिंता है.' लेटर में जोहरान जिस मुलाकात का जिक्र कर रहे हैं वो दिसंबर 2025 में हुई जब उमर खालिद के माता पिता अमेरिका गए थे जहां उन्होंने जोहरान ममदानी से मुलाकात की थी.
किस मामले में बंद है उमर खालिद?
उमर खालिद 2016 में उस वक्त चर्चा में आए थे जब JNU में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी पर कथित कार्यक्रम हुआ. इसी दौरान उमर खालिद और कन्हैया कुमार समेत कई छात्रों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया. आरोप था कि कार्यक्रम में भारत विरोधी नारे लगे. इस घटना के बाद खालिद कुछ दिनों तक गायब रहा और बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, जिसके बाद अपनी सफाई में एक बयान दिया कि मेरा नाम उमर खालिद जरूर है, लेकिन मैं आतंकी नहीं हूं.
उमर खालिद का ये बयान खूब वायरल हुआ था. इस मामले में उसे बाद में जमानत भी मिल गई लेकिन गले की हड्डी बना हुआ है CAA और NRC के खिलाफ फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगे, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई, 700 से ज्यादा लोग जख्मी हुए. इसमें उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत मिलने के कोई आसार दिख नहीं रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है और कथित अपराधों में इन दोनों की भूमिका मुख्य मानी है.
बड़े-बड़े वकील लड़ रहें केस
उमर खालिद, शरजील इमाम के समर्थन में आवाजें उठाने वाले सवाल पूछते रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट कहता है कि जमानत नियम है, जेल अपवाद लेकिन इस सिद्धांत का पालन क्यों नहीं कर रहा? क्यों 5 साल में जमानत नहीं मिली? देश के बड़े-बड़े वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी आरोपियों की लड़ाई लड़ रहे हैं. बीते वक्त में उनके बचाव में सबसे बड़ी दलील ये दी कि दंगे फरवरी 2020 में हुए जबकि शरजील इमाम जनवरी से जेल में थे और उमर खालिद उस समय दिल्ली में थे ही नहीं. उमर ख़ालिद की ओर से दलील रखी गई कि सिर्फ वॉट्सऐप ग्रुप्स में होना, लेकिन कोई संदेश न भेजना, किसी अपराध के दायरे में नहीं आता. खालिद से न तो कोई पैसे की बरामदगी हुई है और न ही कुछ और.
अब उमर खालिद के पास क्या है उपाय?
कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को इस मामले में एक साल तक जमानत याचिका दाखिल करने से भी रोक दिया. साथ ही दिल्ली पुलिस को एक साल के अंदर सभी गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि गवाहों की जांच पूरी होने या अब से एक साल के अंदर, उमर और शरजील जमानत के लिए फिर से निचली अदालत में जा सकते हैं.
हालांकि अदालत ने इसी मामले में 5 अन्य आरोपियों- गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी. बता दें कि उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ में बंद थे. इन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें यूएपीए के अंतर्गत लगे आरोपों की गंभीरता और साजिश की गंभीर प्रकृति के हवाला देकर इनकी जमानत नामंजूर कर दी गई थी.










