PMO का नया पता बना 'सेवा तीर्थ', जानिए इसकी खासियत और बदलाव के पीछे की वजह
PMO New Address: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय अब साउथ ब्लॉक से शिफ्ट होकर 'सेवा तीर्थ 'पहुंच गया है. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने इस आधुनिक परिसर में PMO, कैबिनेट सचिवालय और NSCS एक साथ होंगे. जानिए सेवा तीर्थ की खासियत, नाम बदलने की वजह और इससे जुड़े बड़े बदलाव.

आज यानी 14 जनवरी को एक ओर जहां सभी मकर संक्रांति का त्यौहार मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना ऑफिस शिफ्ट कर रहे हैं. अब प्रधानमंत्री ऑफिस यानी PMO का नया पता सेवा तीर्थ हो गया है. सेंट्रल विस्ट्रा पुनर्विकास परियोजना(Central Vista Redevelopment Project) के तहत 1189 करोड़ की लागत से बनाए गए इस सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री ऑफिस, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय(NSCS) के लिए अलग-अलग बिल्डिंग बनाई गई है. आजादी के बाद से ही PMO साउथ ब्लॉक में था, लेकिन अब इसे सेवा-तीर्थ 1 में शिफ्ट कर दिया गया है. वहीं इसके अलावा PMO के खाली हुए साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को म्यूजियम में बदलने की भी प्लानिंग हो गई है.
क्यों बदला गया ऑफिस?
कहा जा रहा कि यह बदलाव भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की बदलाव वाली सोच का हिस्सा है. केंद्र सरकार इन बदलावों को उपनिवेशवाद को त्यागने यानी पुरानी गुलामी वाली सोच से निकलने और नए भारत के विकास, संस्कृति और लोक भावना वाली सोच को मजबूत के लिए उठाया गया कदम बताती है. इसी सोच की वजह से राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ, योजना आयोग को नीति आयोग सहित कई बदलाव किए गए है.
सेवा तीर्थ में हैं तीन बिल्डिंग
आपको बता दें कि सेवा तीर्थ परिसर को लार्सन एंड टुब्रो ने बनाया है जो कि 2,26,203 वर्ग फुट में फैला हुआ है, जिसमें तीन बिल्डिंग मौजूद है. पहली बिल्डिंग का नाम सेवा-तीर्थ 1 रखा गया है, जहां PMO होगा और इसमें लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस वर्कस्पेस के साथ-साथ भव्य रूम भी बनाए गए है.
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सेवा तीर्थ-2 को पहले ही कैबिनेट सचिवालय को दे दिया गया है और वहीं से कामकाज जारी है. वहीं सेवा-तीर्थ 3 बिल्डिंग राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय(NSCS) के ऑफिस के लिए बनाया गया है. यानी सरकार के तीन महत्वपूर्ण विभाग एक ही जगह पर होंगे और इससे काम में आसानी भी होगी.
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक में बनाया जाएगा म्यूजियम
पीएमओ के शिफ्ट होते ही साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को पब्लिक म्यूजियम बना दिया जाएगा और इसका नाम 'युगे युगीन भारत' होगा. इसके लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की एक म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ डील भी हो चुकी है. कहा जा रहा है कि यह कदम न केवल इन ऐतिहासिक विरासतों को आम लोगों के करीब लाएगा, बल्कि भारत के बढ़ते गौरव और विकास की गाथा को भी दुनिया के सामने रखेगा.
सेवा तीर्थ के पास ही बन रहा पीएम का नया आवास
गुलामी की मानसिकता के प्रतीकों को पीछे छोड़ते हुए मोदी सरकार अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य पथ के जरिए नए भारत की तस्वीर गढ़ रही है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री का नया दफ्तर और निर्माणाधीन 'एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट 2' मील का पत्थर साबित होंगे. सरकार का लक्ष्य मंत्रालयों को एक छत के नीचे आधुनिक इमारतों में लाना है, जिसकी शुरुआत 'कर्तव्य भवन' से हो चुकी है.
क्यों एक जगह लाए जा रहे मंत्रालय?
1189 करोड़ की लागत से बने इस परिसर के पीछे सरकार का मकसद प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाना है. आज की बात करें तो सरकार के मंत्रालय दिल्ली के अलग-अलग जगहों पर मौजूद है लेकिन अब इसे एक साथ लाने के लिए कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) बनाया जा रहा है. इसी योजना के तहत सेवा तीर्थ बनाया गया है.
इनपुट- मनजीत सिंह नेगी
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