Charchit Chehra: कौन हैं जोहो के फाउंडर श्रीधर वेंबू जिनको अचानक लगा 14,000 करोड़ का झटका?
Charchit Chehra: Zoho के फाउंडर श्रीधर वेंबू एक बार फिर सुर्खियों में हैं. अमेरिका की कोर्ट के आदेश के बाद उन पर करीब 14,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करने का दबाव है, जो उनकी पूर्व पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के अधिकारों से जुड़ा है. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए सादगी भरी जिंदगी जीने वाले अरबपति श्रीधर वेंबू की कहानी, जोहो की सफलता, पत्नी से विवाद, कोर्ट केस और पूरे विवाद के पीछे की सच्चाई.

तमिलनाडु के चेन्नई के एक छोटे से गांव माथलमपराई में रहने वाले श्रीधर वेंबू का नाम शायद सुना होगा लेकिन यह शख्स कोई और नहीं बल्कि जोहो के फाउंडर है. आज 'चर्चित चेहरा' में बात जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेंबू की एक ऐसा अरबपति जो महलों में नहीं, गांव की तंग गलियों में रहता है. जिसके पास महंगी गाड़ियों का काफिला नहीं, बल्कि सिर्फ एक साइकिल और एक छोटा सा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर है. श्रीधर वेंबू जो अरबों डॉलर की कंपनी खड़ी कर हजारों लोगों को रोजगार दे रहे हैं, उन्हें करीब 14,000 करोड़ रुपये का झटका लगा है.
मामला प्रमिला श्रीनिवासन के अधिकारों से जुड़ा है जो वेंबू के लिए मुसीबत बन रहा है. वेंबू वो हैं जिनके काम को खुद गृह मंत्री अमित शाह प्रमोट करते हैं, व्हाट्सऐप को टक्कर देने के लिए Arattai लॉन्च किया फिर जोहो मेल ने भी खूब सुर्खियां बटोरी. वेंबू वो हैं जिन्होंने अपने ही राज्य के सीएम से टकराने में जरा नहीं सोचा लेकिन अब जब मुसीबत आई है तो कुछ बोलते नहीं बन रहा है.
चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानेंगे क्या हैं श्रीधर वेंबू की कहानी के पीछे की सच्चाई, क्या है पूरा मामला, क्यों हुआ श्रीधर की पत्नी से विवाद और बताएंगे वो कहानी जिसमें सालों पहले हुआ था बड़ा खेल..
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अचानक चर्चा में क्यों आए श्रीधर वेंबू?
जोहो कॉर्पोरेशन के फाउंडर श्रीधर वेंबू का अमेरिका में सब कुछ बढ़िया चल रहा था क्योंकि बिजनेस चमक रहा था और कंपनी चल पड़ी थी. चाहते तो अमेरिका में ऐशो-आराम के साथ जोहो चलाते रहते लेकिन स्वदेश लौट देश के लिए कुछ करने की सोची, कर भी रहे थे और ऐसा कर इतना छाए कि खबरों की हेडलाइन में आने लगे. अब जितनी चर्चा उनकी कंपनी जोहो की नहीं होती उससे कहीं ज्यादा हजारों-करोड़ की कंपनी के मालिक की सादगी की होती है. श्रीधर वेंबू को ऐसे शख्स के तौर पर देखा जाता है जो अपने देश की मिट्टी का कर्ज उतारने के लिए विदेश छोड़ कामयाब बनकर देश वापस लौटा.
इसके पीछे भी कई तर्क-वितर्क लगते रहे हैं. लेकिन वे इस वक्त चर्चा में हैं क्योंकि अमेरिका की कैलिफोर्निया कोर्ट ने श्रीधर वेंबू को आदेश दिया है कि अपनी पूर्व पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के अधिकारों की सुरक्षा के लिए 1.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 14,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड जमा करें. यह आदेश जनवरी 2025 में प्रमिला की ओर से दी गई एक याचिका पर तब दिया गया जब दूसरा पक्ष कोर्ट में मौजूद नहीं था, अब इसकी चर्चा इसलिए क्योंकि ये जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई थी. अब जब ये जानकारी सामने आई है तो तहलका मच गया है क्योंकि ऐसा होने पर ये दुनिया के सबसे महंगे तलाक की गिनती में शामिल हो जाएगा.
कोर्ट के ऑर्डर को क्यों नहीं मान श्रीधर वेंबू?
कोर्ट ने अपने आदेश में जोहो की अमेरिकी सब्सिडियरी Zoho Corp के री-स्ट्रक्चरिंग के प्रोसेस पर भी रोक लगा दी. कोर्ट में अलग-अलग सुनवाइयों के दौरान श्रीधर वेम्बू ने बॉन्ड न दे पाने के अलग-अलग कारण बताए. कभी उन्होंने कहा कि वे कुछ भी नहीं दे सकते, तो कभी 150 मिलियन डॉलर तक देने की पेशकश की. द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक उन्होंने एक भी डॉलर जमा नहीं किया है और वे अभी भी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं. मामला खबरों में आने के बाद श्रीधर वेम्बू के वकील क्रिस्टोफर सी. मेल्चर ने X पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा- जज को गलत जानकारी देकर यह आदेश दिलवाया गया. इस तरह के बॉन्ड का कोई कानूनी आधार नहीं है. इस मामले पर न्यूज मिनट को किए एक मेल में प्रमिला श्रीनिवासन के वकील जॉन ओ. फार्ले ने ई-मेल में बताया कि- श्रीधर वेम्बू के वकील एक सम्मानित जज पर यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें बेवकूफ बनाया गया.
कहां से शुरू हुई यह कहानी?
कहानी को बेहतर तरीके से समझने के लिए बैकग्राउंड समझना ज्यादा जरूरी है. कुछ साल पहले श्रीधर वेंबू की जिंदगी में ऐसा तूफान आया, जिसने उन्हें पूरी तरह हिला दिया. 2021 तक श्रीधर अपनी पत्नी प्रमिला और बेटे के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहते थे. पत्नी और एक बेटा-श्रीधर का छोटा सुखी परिवार था और रिश्ता 29 साल तक शांति से चला. फिर अचानक पति-पत्नी के रिश्ते में तूफान आ गया. पत्नी ने तलाक मांग लिया. रिश्ते इतने बिगड़े कि श्रीधर पत्नी को पैसा-कौड़ी, संपत्ति देने के लिए तैयार नहीं हुए.
पत्नी प्रमिला ने कोर्ट में शिकायत की कि तलाक से पहले वेंबू ने अपनी सारी संपत्ति बहन और मां के नाम ट्रांसफर कर दी. जोहो के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज भी भारत ट्रांसफर कर दिए. ताकि पत्नी आधा हिस्सा ले न सके. हालांकि श्रीधर वेंबू ने आरोपों को नकारा किया कि पत्नी और बेटे को उनके हाल पर छोड़कर सारे शेयर किसी और ट्रांसफर कर दिए. बेटे की अलग ही कहानी है, कोर्ट में श्रीधर कह चुके हैं कि ऑटिज्म ने हमारी जिंदगी तबाह कर दी और मुझे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया.
श्रीधर के ऐप्स ने शुरू में मचाई खूब आंधी
श्रीधर वेंबू ने देश ही नहीं दुनियाभर में नाम कमाया है. उनके ऐप्स और टेकनोलॉजी को खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह और कई दूसरे कैबिनेट मंत्री प्रमोट कर चुके हैं. कुछ समय पहले जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने Arattai नाम का नया इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप लॉन्च किया था, जिसे WhatsApp के ऑप्शन के तौर पर पेश किया गया. ऐप गूगल प्ले स्टोर पर टॉप रैंकिंग ऐप्स में शामिल हुआ लेकिन आज के हालात देखें तो Arattai गूगल प्ले स्टोर पर इसकी रैंकिंग लगातार नीचे जा रही है.
इससे पहले जोहो Mail को भी इसी तरह प्रमोट किया गया था. केंद्र सरकार और कई बड़े मंत्रियों ने इसे मेड इन इंडिया और सुरक्षित ई-मेल सर्विस बताकर अपनाने की बात कही थी. कई बड़े सरकारी डिपार्टेमेंट में इसका इस्तेमाल भी शुरू हुआ, लेकिन लंबे समय तक यह Gmail जैसे प्लेटफॉर्म को टक्कर नहीं दे सका और आम यूजर्स के बीच खास पकड़ नहीं बना पाया.
जोहो का काम
कंट्रोवर्सी से दूर रहने वाले श्रीधर ने तमिलनाडु की सरकार सीएम स्टालिन से भी पंगा ले चुके हैं, तमिलनाडु में हिंदी को लेकर हुई कंट्रोवर्सी में श्रीधर वेंबू ने सीएम एमके स्टालिन से पंगा लेते हुए हिंदी की सिफारिश कर दी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर खूब बवाल हुआ था. जोहो एक भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो इंटरनेट के जरिए चलने वाले बिजनेस सॉफ्टवेयर बनाती है. इसके सॉफ्टवेयर से ई-मेल भेजना, क्लाइंट की जानकारी संभालना, हिसाब-किताब रखना जैसे काम आसानी से किए जा सकते हैं. ये सॉफ्टवेयर Microsoft Office और Google Workspace का बढ़िया ऑप्शन के तौर पर देखा जाता है.
कौन हैं श्रीधर वेंबू?
श्रीधर का जन्म तमिलनाडु के थंजावुर में एक मिडल क्लास ब्राह्मण फैमिली में हुआ था और अपनी मेहनत के बदौलत ही उन्होंने IIT JEE के एग्जाम में 27वीं रैंक हासिल की और IIT मद्रास और फिर अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. 1994 में क्वालकॉम में नौकरी शुरू की लेकिन उनका मन तो कहीं और ही लगता था, हर महीने मिलने वाली सैलरी की लालच छोड़ कुछ नया और बड़ा करने का सोचा. 1996 में अपने भाई के साथ मिलकर एक सॉफ्टवेयर कंपनी एडवेंट नेट की शुरूआत की, जो अच्छी चलने लगी लेकिन 2001 में आई आर्थिक मंदी के दौर में कई झटके कंपनी को लगे.
उस दौरान कंपनी बेचने के लिए कई अच्छे ऑफर्स मिले लेकिन दोनों भाईयों ने कंपनी बेची नहीं. भाइयों की इस जोड़ी ने जोहो डोमेन नेम खरीद लिया. साल 2009 में एडवेंट नेट का मर्जर जोहो में कर दिया. फिर समय भी आया जिसका इंतजार कई सालों से श्रीधर उनके भाई को था. फोर्ब्स के अनुसार, 2021 तक वो 3.75 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ भारत के 55वें सबसे अमीर व्यक्ति थे. कोविड 19 के दौरान कंपनी को जबरदस्त फायदा हुआ और उसका प्रॉफिट 1918 करोड़ रुपये तक पहुंचा और आज वो एक सफल बिजनेसमैन बन गए.
प्रमिला श्रीनिवासन के बारे में पता चली ये जानकारी
बात करें श्रीधर की पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन की तो लिंक्डइन पर, उन्होंने खुद को अमेरिका में रहने वाली एक Academician, Entrepreneur और हेल्थ टेक एक्सपर्ट बताया है. उनके पास इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में पीएचडी है और उन्होंने हेल्थ टेक, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड और स्पेशल केयर सिस्टम्स में काफी काम किया है. उनके करियर में हेल्थ सर्विस तक पहुंच और डिजिटल इंफ्रा के लिए वकालत भी शामिल है. उन्होंने द ब्रेन फाउंडेशन की स्थापना भी की है, जो अमेरिका स्थित एक नॉन प्रॉफिटेबल संस्था है जो ऑटिज्म रिसर्च, उपचार और सामुदायिक सहायता के लिए समर्पित है.










