कौन हैं कांग्रेस नेता वीडी सतीशन, जिनकी चुनाव से पहले लेफ्ट ने बढ़ाई मुश्किलें, इस मामले में की CBI जांच सिफारिश
Kerala congress news: केरल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली चेहरे और विपक्ष के नेता वीडी सतीशन पर विजिलेंस ब्यूरो ने CBI जांच की सिफारिश करा दी. मनप्पट फाउंडेशन को विदेश से मिले 1.22 करोड़ के फंड में अनियमितताओं के आरोप लगे, कांग्रेस ने इसे चुनावी हथकंडा बताया और सतीशन ने कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया.

VD Satheesan CBI Probe: कांग्रेस का ये आरोप लगा है कि विपक्ष को दबाने, डराने के लिए बीजेपी सीबीआई, ईडी का इस्तेमाल करती है लेकिन केरल में कांग्रेस के दिग्गज नेता वीडी सतीशन के साथ जो हुआ है वो बीजेपी का किया कराया नहीं है. जो हुआ है वो लेफ्ट की पी विजयन सरकार ने किया है और जो किया है वो विधानसभा चुनाव से पहले वीडी सतीशन को घुटने पर लाने के लिए किया गया लगता है. सतीशन ने ऐलान कर दिया कि वो व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों तरह से लड़ेंगे. सीबीआई जांच होती है तो वो जाए लेकिन जांच टिक नहीं पाएगी. सीबीआई जांच का मतलब सतीशन की गिरफ्तारी की नौबत भी ला सकती है वो भी पीक चुनाव में.
वीडी सतीशन केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं. केरल में यूडीएफ चेयरमैन हैं. इन दिनों केरल में सबसे इन्फ्यूंशियल नेताओं में हैं. लेफ्ट की सरकार से लड़ने, चुनाव की स्ट्रैटजी बनाने से लेकर कैंडिडेट सेलेक्शन, टिकट डिस्ट्रीब्यूशन, यूडीएफ में तालमेल-सबके सेंटर में होते हैं. जब से चार्ज में आए हैं, कांग्रेस ने एक भी चुनाव में मात नहीं खाई. अगर चुनाव बाद कांग्रेस की अगुवाई में सरकार बनाने की नौबत आई तो वीडी सतीशन तगड़े दावेदार होंगे.
आगामी चुनाव के बीच बड़ी सतीशन की मुश्किलें
केरल में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं. वीडी सतीशन की पुरानी फाइलें खोल दी गई हैं. सतीशन के खिलाफ चल रही जांच केरल विजिलेंस की टीम कर रही है. Vigilance और Anti-Corruption Bureau ने अचानक राज्य सरकार से कहकर सतीशन के खिलाफ सीबीआई जांच कराने का सिफारिश करवा दी. ये सारा डेवलपमेंट तब हुआ जब पार्टी के तमाम बड़े नेता एकजुट होकर लक्ष्य चुनावी चिंतन के लिए वायनाड में जुटे हुए थे. पार्टी ने ये समझने में कतई देरी नहीं कि सतीशन को फंसाने के लिए चुनावी हथकंडा अपनाया जा रहा है. जिस घोटाले के आरोप में विजिलेंस जांच चल रही थी उसमें कोई फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन मिला नहीं. विधानसभा स्पीकर ने विजिलेंस से सफाई मांगी थी तब ये राज खुला कि सतीशन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले.
मनप्पट फाउंडेशन घोटाले का पूरा मामला
मामला फाउंडेशन को विदेश से मिले चंदे में अनियमितताओं और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन का है. बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए पुनर्जनी प्रोजेक्ट चलाया गया था. मनप्पट फाउंडेशन के अकाउंट में करीब 1.22 करोड़ रुपये जमा हुए लेकिन गलत तरीके से. आरोप लगा कि मनप्पट फाउंडेशन को मिले पैसे वीडी सतीशन के जरिए विदेश से मिले. सतीशन ने विदेश यात्रा के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी ली. वहीं से फंड लाने में गड़बड़ी की. इसी की जांच की लपेटे में मनप्पट फाउंडेशन के सीईओ अमीर अहमद और वीडी सतीशन आए हैं.
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‘सतीशनिज़्म’-एक सेल्फमेड ब्रैंड
वीडी सतीशन को केरल में सेल्फमेड माना जाता है. उनकी पॉलिटिक्स Satheesanism पुकारी जाती है. चुनावी स्ट्रैटजी बनाने और भविष्यवाणियां करने में माहिर माने जाते हैं. नीलांबर उपचुनाव में उन्होंने कहा था कि यूडीएफ उम्मीदवार 15 हजार से जीतेगा. सचमुच आर्यदन शौकत 11 हजार से जीते. सतीशन तब भी जीत के आर्टिकेक्ट माने गए जब 2022 में थ्रिक्काकारा, पुथुपल्ली और पलक्कड़-तीन सीटों पर उपचुनावों में कांग्रेस की हैट्रिक जीत हुई थी.
केरल कांग्रेस का मजबूत किला है लेकिन इस मजबूत किले का कोई एक मजबूत किलेदार नहीं. केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, रमेश चेन्निथला, सनी जोसेफ, सुधाकरन-इतने बड़े-बड़े नेता भरे पड़े हैं. इतनी गुटबाजी कि हाईकमान के लिए किसी को फेस बनाना बहुत रिस्की रहा. नीलांबुर की जीत के बाद वीडी सतीसन की चर्चा इसलिए कि वो सेल्फ मेड कांग्रेस फेस बनकर उभरे. सतीसन अगले चुनाव में सीएम उम्मीदवार की रेस के फ्रंट रनर माने जा रहे हैं.
केरल कांग्रेस में गुटबाजी का गणित
केरल में कांग्रेस गुटों में बंटी मानी जाती है. वीडी सतीशन का गुट, सुधाकरन का गुट, चेन्निथला का गुट, केसी वेणुगोपालन का गुट, शशि थरूर का गुट. चुनाव के नतीजे जिसके पक्ष में ज्यादा होंगे, उसका गुट सबसे मजबूत होगा लेकिन चुनाव से पहले सबसे भारी वीडी सतीशन हैं जिनसे फिलहाल दोस्ती में ही सबकी भलाई है. सतीशन का ही असर है कि रमेश चेन्निथला ने अपना मन-मुटाव भूलकर सतीशन से हाथ मिला लिया.
सतीशन के राजनीतिक सफर पर एक नजर
60 साल के सतीशन करीब 30 साल पहले कांग्रेस में आए तो पूरा जीवन कांग्रेस में बिता दिया. 1996 में पहला चुनाव हार गए तो वकालत शुरू कर दी. 2001 में दूसरी बार लड़कर एर्नाकुलम के परावुर से पहला चुनाव जीते. फिर जीतते ही रहे. 2006, 2011 और 2015 में चुनाव जीतने के बाद 2021 में पांचवीं बार विधायक बने. तब रमेश चेन्निथला विपक्ष के नेता हुआ करते थे. चेन्निथला दिल्ली की राजनीति में बिजी हुए तो सतीशनको कमान मिली. तब से सतीशन कांग्रेस और यूडीएफ के चीफ स्ट्रैटजिस्ट बनकर एक्टिव हैं.
ब्रैंडिंग तब होनी शुरू हुई जब नीलांबुर में कांग्रेस जीती. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में सतीशन लीड रोल में रहे. अब बड़ा टेस्ट है बड़े चुनाव में जीतने का. अगर केरल में भी कांग्रेस ने सत्ता हासिल कर ली तो सतीशन सेंटर ऑफ अस्ट्रैक्शन हो सकते हैं.
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