कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के लिए नीतीश ने PM मोदी को शुक्रिया कहा, क्या मन बना लिया साथ जाने का?

अभिषेक गुप्ता

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Nitish Kumar: मोदी सरकार ने बिहार के 11वें मुख्यमंत्री रहे और ‘जननायक’ कहे जाने वाले कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न देने का ऐलान किया है. यह घोषणा तब की गई जब 24 जनवरी को कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती मनाई जा रही है. सीएम नीतीश ने ट्वीट कर केंद्र सरकार के इस फैसले पर आभार जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है. नीतीश ने पहले ट्वीट में पीएम मोदी का नाम नहीं लिया था. बाद में लिए गए ट्वीट में मोदी का नाम जोड़ा गया. फिर क्या था चर्चा शुरू हुई कि क्या नीतीश और बीजेपी के बीच फिर कुछ पकने लगा.

नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की सालों से ये मांग भी रही है कि कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिया जाए. माना ये जा रहा है कि केंद्र के इस फैसले से बिहार की सियासत में नया मोड़ या सकता है. संभावनाएं ये भी जताई जा रही हैं कि इसी के बहाने नीतीश विपक्षी गठबंधन INDIA को छोड़ NDA में इंट्री भी मार सकते हैं. आइए कर्पूरी के बहाने बिहार में पक रही इस सियासत को समझते हैं.

वैसे बिहार के सीएम नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर की जयंती के उपलक्ष्य में 22 जनवरी से ही प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं. आज पटना में एक रैली होनी है जिसे नीतीश कुमार संबोधित करने वाले हैं.

पहले जानिए नीतीश कुमार ने क्या कहा जिसने इन संभावनाओं को जन्म दिया.

सीएम नीतीश ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘पूर्व मुख्यमंत्री और महान समाजवादी नेता स्व॰ कर्पूरी ठाकुर जी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय है. केंद्र सरकार का यह अच्छा निर्णय है. स्व॰ कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी 100वीं जयंती पर दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों के बीच सकारात्मक भाव पैदा करेगा. हम हमेशा से ही स्व॰ कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की मांग करते रहे हैं. वर्षों की पुरानी मांग आज पूरी हुई है. इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद.

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अब इसी ट्वीट के बाद से नीतीश के बीजेपी के साथ जाने की अटकलें एकबार फिर से जोर पकड़ ली है.

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क्या कर्पूरी ठाकुर के बहाने नीतीश थामेंगे बीजेपी का हाथ

नीतीश ने जिस तहर पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है, उससे बीजेपी और उनके बीच कुछ खिचड़ी पकने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. पिछले दिनों अमित शाह ने भी नीतीश के उनके साथ आने के सवाल पर विचार करने की बात कही थी. यानी उधर से नीतीश को लेकर कोई आपत्ति नहीं है. वैसे भी पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार के विपक्षी गठबंधन INDIA अलायंस के साथ चीजे कुछ ठीक नहीं चल रही हैं. पहले उन्हें अलायंस के संयोजक बनाने की चर्चा थी फिर वो नहीं बने. वे बार-बार अलायंस में सीटों के बंटवारे पर चर्चा करने की बात करने को कहते हैं, लेकिन अभी तक उसपर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है.

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अब सवाल है कि क्या नीतीश सच में INDIA अलायंस का साथ छोड़ देंगे? राजनैतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने ऐसी चार वजहें बताई हैं जिनको आधार बनाकर नीतीश ऐसा कर सकते हैं.

1- गठबंधन में सीटों के बंटवारें में हो रही देरी.

2- अलायंस के संयोजक का पद ठुकरा कर मल्लिकार्जुन खड़गे को संयोजक बनाना.

3- हाल के दिनों में बिहार की सरकार में उनकी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का तेजस्वी यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की कोशिशें.

4- नीतीश अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को छोड़ कर अब पूरा ध्यान 2025 में होने वाले राज्य के विधानसभा चुनाव पर पूरा फोकस करने की रणनीति बना रहे हैं. नीतीश का ध्यान इस ओर ज्यादा है कि कैसे वह 2025 के चुनाव के बाद फिर से सीएम बन सकते हैं?

अब देखना ये होगा कि लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार का रुख क्या रहता है. क्या नीतीश जिस गठबंधन के सूत्रधार रहे हैं उसे छोड़ बीजेपी के साथ जाते हैं या विपक्ष के साथ बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में साथ खड़े रहते हैं?

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