सियासी चक्रव्यूह में फंसी थलापति विजय की 'जननायकन', क्या फिल्म की रिलीज रोकना एक राजनीतिक चाल है?
Shesh Bharat: थलापति विजय की फिल्म जननायकन को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने से रिलीज टल गई है. मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. इसे राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

Shesh Bharat: थलापति विजय ने जब जमा जमाया एक्टिंग करियर दांव पर लगाकर राजनीति में कदम रखा तब शायद ये सोचा न होगा कि तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में बिना चुनाव जीते वो सबके लिए वांटेड बन जाएंगे. विजय ने जब जयनायकन को आखिरी फिल्म घोषित कर दिया तब भी नहीं सोचा होगा कि एक फिल्म उनकी राजनीति के लिए टर्निंग प्वाइंट बनेगी. जो फिल्म कल रिलीज हो जानी चाहिए थी वो रिलीज नहीं हुई. केवल इसलिए कि सेंसर बोर्ड ने रिलीज के लिए सर्टिफिकेट नहीं दिया.
मद्रास हाईकोर्ट के कहने के बाद भी सेंसर बोर्ड ने पूरा जोर लगा दिया कि जननायकन रिलीज करने के लिए सर्टिफिकेट न देना पड़ा. एक फिल्म को लेकर हंगामा इसलिए मचा कि सेंसर बोर्ड के 5 में से 4 सदस्यों ने फिल्म को U/A 16+ certificate देने पर सहमति जताई लेकिन सिर्फ एक सदस्य की आपत्ति के लिए फिल्म की रिलीज रोकी गई और रिव्यू का विवाद कोर्ट तक पहुंच गया.
कॉन्सपिरेसी की अलग-अलग थ्योरी
थलापति की उनहत्तरवीं फिल्म फैंस के लिए अनमोल गिफ्ट जैसी थी लेकिन एक फिल्म को लेकर इतना कुछ हो गया और हो रहा कि कई कॉन्सपिरेसी थ्योरी चल रही है. सारी थ्योरीज में केवल एक ही थ्योरी है जो राजनीतिक नहीं है. बाकी सबका कनेक्शन विजय की इलेक्शन पॉलिटिक्स से जुड़ रहा है.
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सबसे बड़ा सवाल ये कि विजय की आखिरी फिल्म जननायकन सेंसर बोर्ड की सामान्य प्रक्रिया के तहत रूक गई या किसी राजनीतिक कारण से रोकी गई. सबसे पॉपुलर थ्योरी ये चल रही है कि जननायकन रोकी गई ताकि विजय पर ये दवाब बने कि वो बीजेपी के साथ अलायंस कर लें. करूर हादसे को लेकर चल रही जांच में भी सीबीआई ने विजय को पूछताछ के लिए बुलाया है. हालांकि सीबीआई जांच की मांग लेकर विजय की पार्टी टीवीके ही सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी.
कांग्रेस के साथ विजय सबसे सॉफ्ट दिखे
विजय ने पहले दिन से लाइन ली हुई है कि वो किसी से अलायंस नहीं करेंगे. डीएमके से अलायंस करने का सवाल नहीं. AIADMK से अलायंस की बात हुई थी लेकिन आगे बढ़ी नहीं. बीजेपी ने इंटरेस्ट दिखाया लेकिन विजय ने नहीं. कांग्रेस ही अकेली ऐसी पार्टी है जिसको लेकर विजय सबसे सॉफ्ट दिखे हैं. करूर हादसे के बाद राहुल गांधी का विजय को फोन करने से बाद से ये चर्चा बनी हुई है कि डीएमके के साथ अलायंस में होने के बाद भी कांग्रेस विजय के साथ फ्यूचर अलायंस की संभावनाएं तलाश कर रही है.
जनकायकन को सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर जितना हल्ला तमिलनाडु कांग्रेस मचा रही है उतना तो कोई नहीं मचा रहा है. एक खींचतान तो है कि विजय कांग्रेस का चुनाव से पहले या चुनाव बाद कोई अलायंस बन जाए. कांग्रेस ने विजय की लड़ाई को अपना तब बनाया हुआ जबकि उसका डीएमके के साथ अलायंस है और विजय की पहली और सबसे बड़ी लड़ाई डीएमके से सत्ता छीन लेने की है.
डीएमके-बीजेपी मिलकर विजय को निपटाने में लगे?
एनडीटीवी रिपोर्ट के मुताबिक एक थ्योरी ये भी है कि डीएमके-बीजेपी मिलकर विजय को निपटाने में लगे हैं. विजय डीएमके के खिलाफ ही लड़ रहे हैं. विजय को होने वाला नुकसान डीएमके को फायदा है. विजय बीजेपी के साथ नहीं आ रहे. इससे बीजेपी को नुकसान की आशंका दिख रही है. पिछले एक साल में जितनी हवा अकेले विजय ने बनाई है उतना बीजेपी कई साल बाद भी नहीं बना पाई. मजबूरी में उसे AIADMK के साथ दोबारा अलायंस में जाना पड़ा.
एक थ्योरी ये भी है कि विजय इसलिए टारगेट किए जा रहे हैं ताकि और मजबूत हो सकें. अगर विजय मजबूत हुए तो डीएमके को चोट देंगे. इसमें भी फायदा बीजेपी का हो सकता है. खुद विलेन बनकर भी बीजेपी विजय की मदद कर रही है. एक थ्योरी ये है कि जनकायकन की रिलीज में देरी से फायदा विजय को ही होगा. चुनाव में अभी तीन-चार महीने हैं. फिल्म कितनी भी बड़ी हिट हो, 9 जनवरी को रिलीज होकर अप्रैल तक जलवा बनाए रखना मुश्किल होता.
जननायकन की रिलीज में देरी का क्या मतलब?
जननायकन की रिलीज में देरी का मतलब चुनाव से और पहले रिलीज का मौका मिलना. एक और अराजनीतिक थ्योरी है कि शिवाकार्तिकेयन की फिल्म पराशक्ति को चलने दिया जाए जिसके पीछे स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन का हाथ है. एक दिन के अंतर पर रिलीज होने वाली दोनों फिल्मों में टकराव हो रहा था. इसलिए जनकायकन को लेट करके पराशक्ति की ट्रेन पास होने दी जाए जिसको लेकर कोई बड़ा राजनीतिक एंगल है नहीं.
इस पूरे विवाद से पहले से चर्चित जननायकन को और बिना पैसे खर्च किए पब्लिसिटी मिल गई. सबको पता है कि फिल्म बन गई है तो रिलीज भी होगी, भले दो चार कट्स लगाने पड़े. अप्रैल से जब कभी फिल्म रिलीज होगी, चर्चा में होंगे थलापति विजय. पूरे चुनाव में वही एक ऐसे प्लेयर हैं जिनके पास सिनेमा ऐसा हथियार है जिसका इस्तेमाल चुनाव से ठीक किया जा सकता है.
जननायकन फिल्म 14 जनवरी को पोंगल के दिन होगी रिलीज?
जननायकन विजय की फिल्म है जिसने सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर रिलीज पोस्टपोन कर दी लेकिन विजय या टीवीके की ओर से कोई विक्टिम कार्ड नहीं खेला जा रहा है. किसी पर कोई आरोप नहीं, किसी साजिश का इशारा नहीं. किसी राजनीतिक एंगल से सेंसर सर्टिफिकेट में देरी को नहीं जोड़ा.
उन्होंने बस कोर्ट का इशारा किया और मद्रास हाईकोर्ट से अपने पक्ष में फैसला ले आए. अब चूंकि हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने से पहले सेंसर बोर्ड कोर्ट में अपील कर रहा है इसलिए शक बढ रहा है कि मामला रूटीन सेंसर सर्टिफिकेट का नहीं, बल्कि कुछ ऐसा है जिसका सीधा कनेक्शन तमिलनाडु के होने वाले चुनाव से है. एक और बात ये है कि मद्रास हाईकोर्ट में सेंसर बोर्ड की ओर से केस लड़ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पहुंचे. मद्रास हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद ये संभावना बढ़ी है कि विजय की आखिरी फिल्म जनकायकन 14 जनवरी को ऐन पोंगल के दिन रिलीज हो जाए.










