कोटा में कुत्तों का 'तांडव': कलेक्ट्रेट परिसर में तहसीलदार समेत 22 लोगों को काटा, अस्पताल में मची अफरा-तफरी
Kota dog attack: राजस्थान के कोटा में आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर पहुंच गया है. कलेक्ट्रेट परिसर में नायब तहसीलदार समेत 22 लोगों को कुत्तों ने काट लिया, जिससे शहर में दहशत फैल गई. घायलों की भीड़ से एमबीएस अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई है. नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों ने खूंखार कुत्तों को पकड़ने की मांग तेज कर दी है.

राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में रविवार को आवारा कुत्तों ने ऐसा आतंक मचाया कि पूरे शहर में दहशत फैल गई. शहर के अलग-अलग इलाकों में आवारा कुत्तों ने एक ही दिन में नायब तहसीलदार सहित करीब 22 लोगों को अपना शिकार बनाया. कुत्तों के हमले के शिकार लोगों में मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं. कलेक्ट्रेट जैसे सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में भी कुत्ता घुस गया और वहां कई लोगों को जख्मी कर दिया.
कलेक्ट्रेट परिसर में नायब तहसीलदार पर हमला
सबसे हैरान करने वाली घटना कोटा कलेक्ट्रेट परिसर में हुई. एडीएम ऑफिस में कार्यरत नायब तहसीलदार अनुराग शर्मा रविवार सुबह करीब 9:30 बजे ऑफिस पहुंचे थे, तभी एक खूंखार आवारा कुत्ते ने उनके पैर पर हमला कर दिया. हमले इतना जोरदार था कि उनकी पैंट तक फट गई और पैर में गहरे जख्म हो गए. इसी कुत्ते ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद 5 से 7 अन्य लोगों, जिनमें सफाई कर्मी भी शामिल हैं, को काट लिया.
अस्पताल में लगी घायलों की कतार
कुत्तों के हमले के बाद घायलों को तुरंत एमबीएस (MBS) अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गईं. नयापुरा इलाके में अकेले 13 लोग शिकार हुए, जबकि शहर के मस्जिद चौक और अन्य हिस्सों से भी मामले सामने आए. घायलों में एक 5 साल की मासूम बच्ची भी शामिल है. अस्पताल प्रशासन ने बड़ी संख्या में आते मरीजों को देखते हुए स्टाफ को अलर्ट पर रखा.
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"मुक्का मारकर जान बचाई"- चश्मदीद
एक घायल शख्स ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह सुबह 7:00 बजे अपने दोस्तों के साथ बैठा था, तभी एक बड़े कुत्ते ने आकर उसकी जांघ पकड़ ली. कुत्ते ने उसे तीन जगह काटा. जब उसने कुत्ते को छुड़ाने की कोशिश की, तो कुत्ते ने उसके चेहरे पर जंप किया, जिसे उसने मुक्का मारकर रोका. शख्स का दावा है कि वह अकेला कुत्ता अब तक 30-32 लोगों को काट चुका है.
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
शहर में कुत्तों के बढ़ते आतंक ने नगर निगम की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों में कुत्तों को पकड़ने का दावा करता है. उधर, नगर निगम कमिश्नर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार कुत्तों को रेस्क्यू करने के बाद वापस उसी इलाके में छोड़ना पड़ता है. हालांकि, रविवार की घटनाओं के बाद अब विशेष अभियान चलाकर खूंखार कुत्तों को पकड़ने की मांग तेज हो गई है.
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