नागौर में किसान ने खेत में बोए 500-500 के नोट, वजह हैरान करने वाली, वायरल हुई दर्दभरी कहानी

Nagaur Farmer Protest: नागौर के एक किसान ने कपास की फसल बर्बाद होने और फसल बीमा कंपनी की बेरुखी के विरोध में खेत में 500-500 रुपये के नोट बो दिए. किसान का कहना है कि फसल से तो कुछ नहीं मिला, शायद नोट उग जाएं.

nagaur
nagaur
social share
google news

Nagaur Farmer Protest: राजस्थान के नागौर जिले में एक किसान ने अपना दर्द जताने का ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए. कपास की फसल पूरी तरह खराब होने और फसल बीमा से मदद न मिलने पर किसान मल्ला राम बावरी ने खेत में ही 500-500 रुपये के नोट बो दिए. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. अब लोग इसे किसानों की बेबसी की बड़ी तस्वीर बताते हुए सरकार और बीमा कंपनियों पर सवाल उठा रहे हैं.

यह भी पढ़ें...

कर्ज लेकर की थी खेती, बारिश ने छीन ली पूरी उम्मीद

मल्ला राम ने बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लेकर कपास की फसल बोई थी लेकिन इस बार लगातार हुई अतिवृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया. खेत में 2–3 फीट पानी भर गया, पानी का तालाब (डिग्गी) टूट गया और पूरी फसल सड़ गई. किसान के हाथ मात्र 4,000 रुपये की उपज ही लगी.

किसान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाया था. नुकसान होने के बाद उन्होंने बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज की, लेकिन न सर्वे हुआ, न कोई अधिकारी खेत देखने आया. महीनों बाद भी मुआवजे की कोई कार्रवाई नहीं हुई.

"नोट बोए, शायद ये तो उग जाएं"-

निराश होकर मल्ला राम ने विरोध का अनोखा तरीका खोजा. उन्होंने खेत में 500-500 रुपये के नोट बोएं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया. जिसके बाद किसान के विरोध का यह अनोखा तरीका वायरल हो गया. 

मल्ला राम बताते हैं कि "खेती से तो चार हजार मिले. नोट बो दूं, शायद इससे ज्यादा उग जाएं. कम से कम ये नोट तो सड़ेंगे नहीं."

भाई ने बताई हालत: "बारिश ने सब खत्म कर दिया''

मल्ला राम के भाई रामेश्वर लाल ने बताया कि इस बार ज्यादा बारिश से खेतों में 2-3 फीट पानी भर गया था, डिग्गी फूट गई और ट्यूबवेल तक खराब हो गई.

उन्होंने बताया, ''पूरी की पूरी कपास की फसल गलकर खत्म हो गई. बैंक ब्याज भरने को कह रहा है, बीमा का प्रीमियम कट गया पर फायदा कुछ नहीं मिला.''

मालाराम बोले - ''अब किस-किस को पैसे दें?''

पीड़ित किसान मालाराम ने बताया कि उन्होंने 2–2.5 लाख रुपये खर्च कर फसल बोई थी और बदले में कुछ हजार की उपज मिली.

वे कहते हैं - "लोन वालों को दें, बीज-खाद वालों को दें, या घर का राशन खरीदें? बीमा वालों ने कोई सुनवाई नहीं की, इसलिए नोट बोने पड़े."

गिरदावरी तक नहीं हुई, किसान असहाय

किसान ने पटवारी से गिरदावरी की मांग भी की थी, लेकिन तेज बारिश का बहाना देकर कोई सर्वे नहीं हुआ. ग्रामीणों का भी आरोप है कि नागौर में इस बार कपास, मूंग, ग्वार सहित कई फसलें बर्बाद हुई हैं लेकिन बीमा कंपनियां दावे नहीं निपटा रहीं.

"कब बदलेगी व्यवस्था?"

वीडियो पर लोग फसल बीमा योजना की खामियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. कई ने लिखा कि जब तक प्रशासन और बीमा कंपनियों पर कार्रवाई नहीं होगी, किसानों को ऐसे विरोध करने पड़ेंगे.

वीडियो वायरल

 

    follow on google news