Chhapra में गरीब महिला की मौत पर सबने छोड़ा साथ, बेटियों ने मां को दिया कंधा और मुखाग्नि, श्राद्ध के लिए लगा रही गुहार

छपरा में बेटा न होने और गरीबी के कारण जब ग्रामीणों ने महिला के शव को कंधा देने से इनकार कर दिया तो उसकी दो बेटियों ने खुद अर्थी उठाकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की.

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बिहार के सारण जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली और साथ ही बेटियों के साहस की एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां एक गरीब महिला की मौत के बाद जब समाज ने मुंह मोड़ लिया और कंधा देने तक कोई नहीं आया, तो दो बेटियों ने खुद अपनी मां की अर्थी उठाई और श्मशान ले जाकर अंतिम संस्कार किया.

बेटा नहीं है तो कंधा भी नहीं

घटना मढ़ौरा प्रखंड के जवनिया गांव की है. यहां स्वर्गीय रविंद्र सिंह की पत्नी बबीता देवी का बीमारी के कारण निधन हो गया. महिला का कोई बेटा नहीं था जिसके कारण समाज के तथाकथित ठेकेदारों ने दूरी बना ली. बेटियों ने गांव में घर-घर जाकर मदद की गुहार लगाई, हाथ जोड़े, लेकिन गरीबी और 'बेटा न होने' के तंज के बीच किसी ने शव को हाथ तक नहीं लगाया.

बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज

बड़ी बेटी मौसमी, जो दिल्ली में मजदूरी करती है, मां की मौत की खबर पाकर गांव पहुंची. जब उसने देखा कि कोई आगे नहीं आ रहा तो उसने अपनी छोटी बहन रोशनी के साथ मिलकर मां के शव को कंधा दिया और श्मशान घाट तक ले गईं. बेटियों ने ही मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं. मौसमी ने रोते हुए बताया कि लोग मदद के लिए अमीरी-गरीबी देखते है उनके पास पैसे नहीं थे इसलिए किसी ने साथ नहीं दिया.

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श्राद्ध के लिए अब भी लगा रही हैं गुहार

मां के निधन को 11-12 दिन बीत चुके हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अब भी श्राद्ध कर्म रुका हुआ है. बेटियां आज भी समाज और प्रशासन से गुहार लगा रही हैं कि उनकी मां की आत्मा की शांति के लिए होने वाले भोज और कर्मकांड में कोई उनकी मदद करे. पति की मौत डेढ़ साल पहले ही हो चुकी थी, जिसके बाद से यह परिवार दाने-दाने को मोहताज है.

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