बिहार विधानसभा चुनाव हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे PK, CJI ने पूछे ऐसे सवाल कि वापस लेनी पड़ी याचिका
बिहार में ‘तीसरी ताकत’ बनने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर को चुनावी नतीजों ने बड़ा झटका दिया. जन सुराज की करारी हार के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पीके को CJI के तीखे सवालों और जुर्माने की चेतावनी के बाद याचिका वापस लेनी पड़ी.

Prashant Kishor: बिहार बदलने के लिए प्रशांत किशोर इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट का काम छोड़कर राजनीति में कूदे. जनसुराज नाम की पार्टी बनाईं. बिना किसी से अलायंस किए, खुद चुनाव लड़े बीजेपी, आरजेडी, जेडीयू को हराने कूद पड़े. चुनाव नतीजे आने तक प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी का खूब डंका बजा लेकिन हुआ क्या. सारी सीटों पर हार हुई. इतने वोट भी इतना नहीं मिले कि प्रशांत किशोर बिहार के नेता बन गए हो. इतना सब होने के बाद प्रशांत किशोर ने बिहार चुनावों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई. आरोप लगाया कि करप्शन हुआ. जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि बिहार चुनाव को 'अवैध' घोषित कर रद्द कर दिया जाए.
CJI ने पूछे तीखे सवाल और किया तंज
जब मामला CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने आया, तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई. प्रशांत किशोर के वकील चंदर उदय सिंह ने दलीलें शुरू ही की थीं कि कोर्ट ने तीखे सवाल दाग दिए. जैसे ही जन सुराज के वकील ने दलीलें शुरू कीं, CJI सूर्य कांत ने टोकते हुए पूछा- "आपकी पार्टी को चुनाव में कुल कितने वोट मिले? क्या आप कोई भी सीट जीत पाए? जब वकील ने हार स्वीकार की, तो चीफ जस्टिस ने ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद लोकप्रियता हासिल करने के लिए कोर्ट को मंच न बनाएं. चुनाव हारने वाले हर शख्स को लगता है कि धांधली हुई है. क्या हम हर चुनाव रद्द कर दें?
जुर्माने की चेतावनी के बाद याचिका वापसी
वकील ने दलील दी कि सरकारी खजाने से 35 लाख महिलाओं को सीधे पैसे देना 'रिश्वत' है. इस पर बेंच ने सख्त टिप्पणी की- "भारत के मतदाता इतने भोले नहीं हैं कि सिर्फ 10 हजार रुपये के लिए अपना वोट बदल दें. मतदाताओं की बुद्धिमत्ता पर सवाल उठाना बंद करें. कोर्ट ने प्रक्रियात्मक गलती (Procedural Lapse) पर उंगली उठाई. बेंच ने पूछा— "अगर आपको चुनावी धांधली की शिकायत थी, तो आप पटना हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? आप सीधे दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट) क्यों आ गए? क्या आपको निचली अदालतों पर भरोसा नहीं है?
यह भी पढ़ें...
जब वकील ने दलीलें जारी रखनी चाहीं, तो CJI ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह की "तुच्छ और राजनीति से प्रेरित" याचिकाओं पर कोर्ट भारी जुर्माना लगा सकता है. यह सुनकर प्रशांत किशोर की टीम ने तुरंत याचिका वापस लेने का फैसला किया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि 'डिस्मिस एज़ विदड्रॉन' किया. इसका मतलब है कि प्रशांत किशोर के पास अब केवल पटना हाई कोर्ट जाने का रास्ता बचा है.
जन सुराज की याचिका में लगाए गए 3 बड़े आरोप
पीके जनसुराज की याचिका में 3 बड़े आरोप लगाए गए. नीतीश सरकार पर आरोप कि चुनाव से ठीक पहले 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के नाम पर 35 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए. 1.8 लाख जीविका दीदियों को पोलिंग बूथ पर तैनात कर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप. आचार संहिता के दौरान सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये बांटने का दावा. कोर्ट ने एक भी दलील सुनने लायक नहीं माना. प्रशांत किशोर ने जो 10 हजार देने को करप्शन माना उसी को नीतीश कुमार की सत्ता में वापसी का कारण माना गया.
प्रशांत किशोर ने इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट के तौर पर खूब नाम कमाया लेकिन जैसे ही अपने चुनाव की स्ट्रैटजिस्ट बनाई, फेल भी हुए और जगहंसाई भी हुई. प्रशांत किशोर ने जन सुराज को NDA और महागठबंधन के विकल्प के तौर पर 'तीसरी शक्ति' के रूप में पेश किया था.
जन सुराज की हार और NDA की बंपर जीत
कहां तो प्रशांत किशोर सीएम बनने के दावे कर रहे थे लेकिन चुनाव के लिए नामांकन भरने की नौबत आई तो उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया. माना गया कि उस एक फैसले से जनसुराज की रही सही संभावना पर भी गहरी चोट लगी. जन सुराज ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी. जन सुराज के दो उम्मीदवारों को छोड़कर पार्टी के 236 सीटों पर 99% उम्मीदवारों की जमानत ज़ब्त हो गई. जन सुराज को मात्र 3.44% वोट मिले. चौंकाने वाली बात ये रही कि 68 विधानसभा सीटों पर पार्टी को NOTA से भी कम वोट मिले. बीजेपी के एनडीए ने छप्पर फाड़ बहुमत के साथ 243 सीटों में से 202 सीटें. विपक्षी गठबंधन इंडिया को केवल 35 सीट मिलीं जिसमें कांग्रेस को मिली 6 सीटें शामिल हैं.
हार के बाद भी मैदान छोड़ने को तैयार नहीं PK
भारी हार के बावजूद, प्रशांत किशोर और जन सुराज ने राजनीति से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं. प्रशांत किशोर ने हार स्वीकार करते हुए कहा है कि बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे. चुनावी मैदान में हार के बाद अब पार्टी कानूनी रास्ते से अपनी ज़मीन तलाश रही है. सुप्रीम कोर्ट में चुनाव रद्द करने की याचिका दायर की थी, जिसे अब अब पटना हाई कोर्ट ले जाने की तैयारी में हैं.
अब नई यात्रा और आत्ममंथन की तैयारी
जन सुराज के लिए 2025 का चुनाव एक बड़ा 'रियलिटी चेक' रहा. सोशल मीडिया पर मज़बूत मौजूदगी और लंबी पदयात्रा के बावजूद, प्रशांत किशोर इसे वोटों में तब्दील करने में विफल रहे. अब देखना यह है कि क्या वो अगले 5 साल तक बिहार की राजनीति में टिक पाएंगे या नहीं. चुनाव बाद जितने नामीगिरामी लोग पार्टी में आए थे वो सारे निकल गए. प्रशांत किशोर ने इशारा किया है कि वो टिके रहेंगे. 8 फरवरी से 13 फरवरी तक बिहार में उनकी एक और यात्रा हो रही है जिसमें जनता से सीधे संवाद और आत्ममंथन करेंगे. यात्रा चंपारण से शुरू होगी और 13 फरवरी को वैशाली में खत्म होगी.










