आंखों की रोशनी नहीं, पर इरादों में है दम... बिहार के रवि राज ने UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, संघर्ष की कहानी जीत लेगी दिल
Upsc 2025 Topper Ravi Raj: देख नहीं सकते थे फिर भी नवादा के रवि राज ने यूपीएससी 2025 में 20वीं रैंक हासिल की है. जो उनकी अटूट इच्छाशक्ति की एक मिसाल है. बीपीएससी और फिर यूपीएससी 2024 में 182वीं रैंक (IRS) पाने के बाद, लगातार तीसरे बड़े चयन के साथ अब वे आईएएस (IAS) बनने के अपने सपने को पूरा करेंगे.

बिहार की धरती एक बार फिर देश को एक ऐसा हीरा देने जा रही है, जिसने अपनी मुश्किलों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. नवादा जिले के रहने वाले रवि राज ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की है. रवि की इस कामयाबी की सबसे खास बात यह है कि वे दृष्टिबाधित (Visually Impaired) हैं, लेकिन उनकी सफलता की चमक आज पूरे देश में दिखाई दे रही है.
एक-एक कर सफलता की सीढ़ियां चढ़े रवि
रवि राज के लिए सफलता का यह स्वाद नया नहीं है लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबा सफर तय किया है. यूपीएससी से पहले रवि ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर अपनी काबिलियत साबित की थी. पिछले साल रवि ने यूपीएससी में 182वीं रैंक प्राप्त की थी, जिसके बाद उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (IRS) मिली थी.
UPSC 2025 में आईआरएस अधिकारी बनने के बाद भी उनका लक्ष्य आईएएस (IAS) था और इस बार 20वीं रैंक के साथ उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया.
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स्क्राइब (Scribe) का साथ, पर ज्ञान रवि का अपना
नियमों के मुताबिक जो उम्मीदवार देख नहीं सकते वो परीक्षा में उत्तर लिखने के लिए एक सहायक रखने की अनुमति होती है. लेकिन परीक्षा का दबाव झेलना, सटीक रणनीति बनाना और सवालों के बेहतरीन जवाब तैयार करना पूरी तरह से उम्मीदवार की अपनी मेहनत होती है. रवि ने अपनी बुद्धिमानी और कड़ी मेहनत से यह साबित किया कि शारीरिक अक्षमता ज्ञान के आड़े नहीं आती.
नवादा से दिल्ली तक का सफर
रवि की पढ़ाई की बात करें तो उनकी नींव मजबूत रही है. 10वीं तक की पढ़ाई उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से की. इसके बाद उन्होंने अपने गृह जिले नवादा से ही ग्रेजुएशन किया और साल 2021 में स्नातक की डिग्री पूरी की. छोटी सी जगह से निकलकर देश के सबसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचना बताता है कि प्रतिभा किसी बड़े महानगर की मोहताज नहीं है.
रवि राज की यह जीत उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो छोटी-छोटी परेशानियों से हार मान लेते हैं. रवि की कहानी हमें सिखाती है कि बाधाएं आपको केवल तब तक रोक सकती हैं जब तक आप रुकने का फैसला नहीं कर लेते.










