'गुड मॉर्निंग का मैसेज आया, फिर सब खत्म', अजित पवार विमान हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी की दादी का दर्द
अजित पवार के विमान हादसे में को-पायलट शांभवी पाठक की मौत से ग्वालियर में शोक की लहर है. हादसे से पहले आए आखिरी गुड मॉर्निंग मैसेज को याद करते हुए उनकी दादी गहरे सदमे में हैं.

बुधवार यानी 28 जनवरी की सुबह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड विमान पुणे के बारामती के पास हादसे का शिकार हो गया. इस भीषण विमान दुर्घटना में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिनमें को-पायलट शांभवी पाठक भी शामिल थीं. यह हादसा न सिर्फ राजनीति और प्रशासनिक हलकों में बल्कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी गहरा शोक छोड़ गया जहां शांभवी का परिवार रहता है.
हादसे की खबर सामने आने के बाद ग्वालियर के बसंत विहार इलाके में रहने वाली शांभवी की दादी पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. सुबह कुछ घंटे पहले तक जिनसे उन्होंने मोबाइल पर बात की थी, वही पोती अब कभी लौटकर नहीं आएगी इस सच्चाई को स्वीकार करना उनके लिए सबसे मुश्किल हो गया है. दादी की आंखों में आंसू हैं और आवाज में कांपता हुआ दर्द, जब वह उस आखिरी गुड मॉर्निंग मैसेज और फोन कॉल की कहानी सुनाती हैं.
शांभवी की दादी ने क्या कहा
उन्होंने ANI को बताया कि सुबह शांभवी का गुड मॉर्निंग मैसेज आया था. फिर सब कुछ खत्म हो गया. दादी ने बताया कि उनके पास करीब ग्यारह बजे फोन आया. उन्होंने कहा मैंने तो सुबह से कोई न्यूज देखी ही नहीं थी. छोटे बेटे ने बस इतना कहा था मम्मी, ऐसा हादसा हो गया है और प्लेन उसी का था.
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यह कहते-कहते ग्वालियर में रहने वाली शांभवी पाठक की दादी की आवाज भर आती है. उन्हें क्या पता था कि सुबह 6:36 बजे आया गुड मॉर्निंग, ददा का मैसेज उनकी पोती का आखिरी मैसेज होगा.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के चार्टर्ड विमान हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी पाठक ग्वालियर की बेटी थीं. इस हादसे के बाद उनका परिवार सदमे में है और घर-घर शोक का माहौल है.

दादी ने एक दिन पहले ही किया था फोन
दादी ने बताया कि एक रात पहले ही उन्होंने शांभवी के पिता से फोन पर पूछा था कि चीनी कहां है? कहां फ्लाइट कर रही है? जिसके में उन्हें बताया गया कि वो कल मुंबई चली गई है. बस यही बात अगले दिन डर बनकर सामने आ गई. दादी बताती हैं कि उनकी आखिरी मुलाकात 12 अक्टूबर को हुई थी.
शांभवी का जन्म ग्वालियर में हुआ था. दादी-दादा 1998 से बसंत विहार के इसी घर में रह रहे हैं. शांभवी ने चौथी-पांचवीं तक की पढ़ाई ग्वालियर में की उसके बाद परिवार दिल्ली चला गया. दिल्ली के लोधी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल में उनकी पढ़ाई हुई.
खून में था पायलेट बनना
पायलट बनना शायद उनके खून में था. पिता भारतीय वायुसेना में रहे, दादाजी विंग कमांडर थें. दादी कहती हैं, इतना तो नहीं पता कि बचपन से ही पायलट बनना चाहती थी या नहीं लेकिन जहाजों से उसका रिश्ता शुरू से रहा है.
पायलट की ट्रेनिंग शांभवी ने न्यूजीलैंड से ली थी. परीक्षा देने के लिए वह हर साल लंदन जाया करती थीं. कोविड के समय भारत लौट आई थीं और करीब 2021 से फ्लाइंग सर्विस में थीं. उम्र करीब 25 साल, लेकिन अनुभव और आत्मविश्वास बहुत था.
हादसे वाले दिन भेजा था व्हाटसएप मैसेज
हादसे वाले दिन सुबह उन्होंने दादी को व्हाट्सएप मैसेज भेजा था. उसके बाद फोन नहीं लगा. पहले रीचेबल आता रहा, फिर सब शांत हो गया. जब सच्चाई सामने आई तो पूरा परिवार टूट गया.
शांभवी को घर में आज भी सब चीनी कहकर ही याद करते हैं. पूजा वाले कमरे में उनकी तस्वीर रखी है. दादी बताती हैं कि शांभवी को भगवान में बहुत आस्था थी हनुमान जी की तस्वीर हमेशा अपने कमरे में रखती थीं. हादसे की खबर मिलते ही पड़ोसी और रिश्तेदार घर पहुंचने लगे. ग्वालियर के इस शांत मोहल्ले में आज सिर्फ सन्नाटा और आंसू हैं. हर किसी की जुबान पर एक ही बात है. इतनी होनहार और हंसमुख लड़की यूं अचानक चली जाएगी, किसी ने सोचा नहीं था.
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