BMC Election: क्या ठाकरे बंधुओं का साथ आना बिगाड़ेगा महायुति का खेल? Axis My India के प्रदीप गुप्ता ने बताया मुंबई का 'सियासी गणित'
BMC Election 2026: मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. 'मुंबई मंथन' कार्यक्रम में Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने बीएमसी चुनाव को लेकर मुंबई का सियासी गणित समझाया. उनका कहना है कि अगर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ आते हैं तो यह महायुति (बीजेपी-शिंदे सेना) के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. जानिए पूरी बात.

मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनावों की आहट के बीच सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इसी बीच आजतक के कार्यक्रम 'मुंबई मंथन' में देश के जाने-माने कई पॉलिटिकल एनालिस्टों ने अपनी राय रखी. इसी कड़ी में चर्चित सेफोलॉजिस्ट और और Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने मुंबई की राजनीति और आगामी चुनावों को लेकर कई चौंकाने वाले पॉइंट्स बताए है. प्रदीप गुप्ता के मुताबिक, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (ठाकरे ब्रदर्स) का प्रभाव और वोटिंग प्रतिशत इस बार के नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाने वाला है. आइए विस्तार से जानते है पूरी बात.
ठाकरे ब्रदर्स के मिलन से क्या होगा?
प्रदीप गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि मुंबई की राजनीति में 'ठाकरे' सरनेम और शिवसेना की जड़ें बहुत गहरी हैं. उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार या शिवसेना भले ही हमेशा सत्ता के शीर्ष पर न रही हो, लेकिन बीएमसी पर उनका 25 साल का लंबा शासन उनके जमीनी जुड़ाव को दर्शाता है. उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में 'नगर सेवक'(पार्षद) जनता की जरूरतों से जितना जुड़ा होता है, उतना शायद ही देश में कहीं और हो. फिर उन्होंने इसके पीछे का तर्क देते हुए कहा कि, मुंबई के वार्डों में आज भी शिवसेना (UBT) की ब्रांडिंग वाली एम्बुलेंस हमेशा खड़ी रहती हैं, जो उनके जमीनी कनेक्शन को दर्शाती हैं.
वोट प्रतिशत का गणित
प्रदीप गुप्ता ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगर इस बार बीएमसी चुनाव में मतदान 50% से नीचे गिरता है, तो यह महायुति (बीजेपी + शिंदे सेना) के लिए खतरे की घंटी हो सकती है. कम वोटिंग की स्थिति में 'ठाकरे ब्रदर्स' (उद्धव और राज ठाकरे) को सीधा फायदा मिल सकता है. प्रदीप गुप्ता के एनालिसिस के मुताबिक, जो समीकरण अभी कागजों पर मजबूत दिख रहे हैं, वे कम वोटिंग होने पर हकीकत में कमजोर साबित हो सकते हैं.
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बीएमसी चुनाव 2017 बनाम वर्तमान स्थिति
प्रदीप गुप्ता ने पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2017 के बीएमसी चुनावों में बीजेपी और शिवसेना के बीच केवल 1% वोट और 2 सीटों का अंतर था. पिछले विधानसभा चुनावों में MNS (राज ठाकरे की पार्टी) को करीब 7% वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो मुंबई की 6 सीटों में से 4 पर महाविकास अघाड़ी (UBT + कांग्रेस) का कब्जा है, जबकि महायुति के पास केवल 2 सीटें हैं. वहीं दक्षिण मुंबई और मुंबई सेंट्रल जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर UBT का वर्चस्व बरकरार है.
किसका पलड़ा भारी?
प्रदीप गुप्ता का मानना है कि कागजों पर फिलहाल बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना का गठबंधन मजबूत नजर आता है. शिंदे सेना का बड़ा प्रभाव ठाणे और उसके आसपास के इलाकों में है, लेकिन 'ग्रेटर बॉम्बे' (मुंबई महानगर) में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) आज भी एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस इस लड़ाई में मजबूती से साथ होती, तो मुकाबला और भी ज्यादा रोमांचक होता.
क्या राज ठाकरे बनेंगे 'किंगमेकर'?
प्रदीप गुप्ता ने साफ कहा कि, मुंबई के चुनावी रुझान पूरे महाराष्ट्र से अलग होते हैं. जहां पूरे महाराष्ट्र में महायुति का स्ट्राइक रेट काफी ऊंचा रहा है, वहीं मुंबई की 36 विधानसभा सीटों पर मुकाबला 60-40 का रहा है, जो काफी करीबी है. ऐसे में राज ठाकरे की MNS का वोट बैंक किधर झुकता है, यह बीएमसी की सत्ता की चाबी तय करेगा.
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