Shesh Bharat: मिल्की ब्यूटी से मैसूर सोप तक, तमन्ना भाटिया के नाम पर कर्नाटक में क्यों मचा बवाल?

Shesh Bharat: मैसूर संदल सोप को तमन्ना भाटिया का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने पर कर्नाटक में विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष इसे कन्नड़ अस्मिता से जोड़ रहा है, जबकि सरकार ग्लोबल ब्रांडिंग का तर्क दे रही है. मामला अब सियासी बहस बन चुका है.

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Shesh Bharat: दक्षिण से लेकर बॉलीवुड तक अपनी पहचान बना चुकीं 'मिल्की ब्यूटी' तमन्ना भाटिया इन दिनों किसी फिल्म नहीं, बल्कि एक साबुन को लेकर चर्चा में हैं. 100 साल से ज्यादा पुराने और कर्नाटक की पहचान माने जाने वाले मैसूर संदल सोप के विज्ञापन से उनका नाम जुड़ते ही सियासी और भाषाई विवाद शुरू हो गया है.

कर्नाटक सरकार की कंपनी Karnataka Soaps and Detergents Limited (KSDL) ने तमन्ना को दो साल के लिए ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है. इस करार के तहत उन्हें करीब 6.20 करोड़ रुपये मिलेंगे. जैसे ही यह फैसला सामने आया, कन्नड़ समर्थक संगठनों और विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए.

क्या है विवाद की जड़!

विवाद की जड़ ‘कन्नड़ अस्मिता’ है. विरोध करने वालों का कहना है कि मैसूर संदल सोप केवल एक साबुन नहीं, बल्कि कर्नाटक का गौरव और GI टैग वाला ब्रांड है. ऐसे में किसी गैर-कन्नड़ चेहरे को इसका प्रतिनिधि बनाना गलत संदेश देता है. विपक्ष ने तुलना करते हुए रश्मिका मंदाना और सप्तमी गौड़ा जैसी कन्नड़ अभिनेत्रियों का नाम भी उछाला.

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चूंकि KSDL एक सरकारी कंपनी है, इसलिए इस फैसले पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सहमति भी रही. इसी वजह से कांग्रेस सरकार पर ‘कन्नड़ विरोधी’ होने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

सरकार का क्या कहना है?

सरकार और KSDL का तर्क साफ है- ग्लोबल ब्रांडिंग. कंपनी का कहना है कि मैसूर संदल सोप को अब सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रखना, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाना है. तमन्ना की पैन-इंडिया और इंटरनेशनल अपील से बिक्री बढ़ाने की उम्मीद है. KSDL का लक्ष्य 1,200 करोड़ रुपये के टर्नओवर को 2,000 करोड़ तक पहुंचाना है.

डीके शिवकुमार की टीम का मानना है कि तमन्ना की 'क्लासिक मिल्की ब्यूटी' इमेज चंदन की शुद्धता और सफेदी से मेल खाती है. उनका तर्क है कि अगर दिल्ली या न्यूयॉर्क में मैसूर सोप बिकता है, तो इसमें कन्नड़ विरोधी क्या है?

तमन्ना दिल्ली में जन्मी, पंजाबी परिवार से आती हैं. उन्होंने साउथ सिनेमा में बड़ी पहचान बनाई और फिर बॉलीवुड में भी जगह बनाई. 80 से ज्यादा फिल्मों और करीब 120 करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ अब उनके करियर में मैसूर संदल सोप भी जुड़ गया है.

रश्मिका बनाम तमन्ना: सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

दूसरी ओर, रश्मिका मंदाना को 'कन्नड़ गौरव' और 'नेशनल क्रश' माना जाता है. इसी वजह से यह विवाद अब रीजनल बनाम ग्लोबल की बहस में बदल गया है. सोशल मीडिया पर दोनों अभिनेत्रियों के फैंस आमने-सामने हैं.

100 साल का गौरवशाली इतिहास

मैसूर संदल सोप का इतिहास भी खास है. 1916 में मैसूर के राजा कृष्णराजा वोडेयार ने इसकी शुरुआत कराई थी. यह दुनिया का इकलौता साबुन है जो 100% चंदन के तेल से बनता है. 100 साल तक यह बिना किसी सेलिब्रिटी चेहरे के बिकता रहा. 2006 में पहली बार ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था, तब भी विवाद हुआ था. अब तमन्ना के आने से एक बार फिर बहस तेज है.

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