स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और रामभद्राचार्य के बीच छिड़ा 'वाक-युद्ध', एक-दूसरे पर लगाए बेहद तीखे आरोप
Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy: प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और जगतगुरु रामभद्राचार्य के बीच तीखा वाक-युद्ध छिड़ गया है. मौनी अमावस्या के स्नान विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब नकली शंकराचार्य, देशद्रोह, राजनीतिक फंडिंग और सन्यास की पात्रता जैसे गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है. जानिए विवाद की कहानी से लेकर एक-दूसरे का आरोप तक.

संगम की रेती पर लगे माघ मेले में इन दिनों भक्ति के साथ-साथ एक बड़ा विवाद भी गरमाया हुआ है. यह विवाद दो बड़े संतों जगतगुरु रामभद्राचार्य और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच छिड़ गया है. दोनों के बीच ज़ुबानी जंग इतनी बढ़ गई है कि मामला अब सीधे व्यक्तिगत आरोपों और नकली से लेकर देशद्रोह तक पहुंच गया है. आइए जानते है विवाद की कहानी और दोनों संतों ने एक-दूसरे पर क्या लगाए आरोप.
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई थी. आरोप है कि जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब मेला प्रशासन ने उन्हें रोक दिया. इस दौरान उनके समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की खबरें भी आईं. इसी अपमान के विरोध में अविमुक्तेश्वरानंद ने मोर्चा खोल रखा है और बसंत पंचमी का स्नान भी नहीं किया.
रामभद्राचार्य का हमला: 'ये शंकराचार्य ही नहीं हैं'
जगतगुरु रामभद्राचार्य ने इस पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन का समर्थन किया और अविमुक्तेश्वरानंद पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा:
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नकली शंकराचार्य: रामभद्राचार्य ने उन्हें 'नकली' बताते हुए कहा कि वे शंकराचार्य हैं ही नहीं.
देशद्रोह का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद धारा 370 को वापस लाने और उद्धव ठाकरे का समर्थन करने जैसी बातें करते हैं. रामभद्राचार्य ने यहां तक कह दिया कि उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए.
पॉलिटिकल फंडिंग: उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे विवाद के पीछे समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का हाथ है और उन्हें वहीं से फंड मिल रहा है.
अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: 'आप सन्यासी बनने योग्य नहीं'
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी चुप रहने के बजाय शास्त्रों का हवाला देते हुए रामभद्राचार्य को घेरा. उन्होंने कहा:
शास्त्रों का हवाला: अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति शारीरिक रूप से दिव्यांग (विकलांग) हो, उसे सन्यासी बनने का अधिकार ही नहीं हैं.
सरकार के मोहरे: उन्होंने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य केवल पीएम मोदी और सीएम योगी के मित्र होने के नाते ऐसी बातें कर रहे हैं और वे केवल राजनीतिक साठगांठ करके पुरस्कार बटोर रहे हैं.
गौ-रक्षा पर सवाल: उन्होंने रामभद्राचार्य पर आरोप लगाया कि वे गौ-हत्यारों को अपना मित्र कहते हैं, तो फिर वे धर्माचार्य कैसे हुए?
प्रशासन का रुख
इस बीच, मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर पूछा है कि वे किस हैसियत से शंकराचार्य शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने हाथ जोड़कर इस विवाद को खत्म करने की अपील की है. फिलहाल, संतों के बीच छिड़ा यह संग्राम थमता नजर नहीं आ रहा है और सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर दो गुटों में बँटे हुए हैं.
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