संगम पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ बदसलूकी? भारी हंगामे के बाद बोले- 'मेरी हत्या की साजिश थी'

प्रयागराज के माघ मेले में संगम स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन पर अपनी हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है.

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप.
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मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम स्नान के लिए निकले ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प का मामला सामने आया है. प्रशासन द्वारा रोके जाने और शिष्यों के साथ हुई मारपीट से आहत शंकराचार्य अपने आश्रम के बाहर सड़क पर ही बैठ गए हैं. उन्होंने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए इसे अपनी 'हत्या की साजिश' करार दिया है.

पुलिस ने पालकी से उतरने का आदेश दिया

शंकराचार्य ने बताया कि वे पिछले 40 सालों से माघ मेले में स्नान के लिए जाते रहे हैं. भीड़ को नियंत्रित रखने और भक्तों को दूर से दर्शन देने के लिए वे पिछले 2-3 वर्षों से पालकी का उपयोग कर रहे हैं. स्वामी जी का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया और पालकी से नीचे उतरने का आदेश दिया. उन्होंने सवाल उठाया, "शंकराचार्य को पालकी से उतरने का आदेश देने का अधिकार मेला प्रशासन को किसने दिया?".

शिष्यों के साथ मारपीट और हत्या की आशंका

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भावुक होते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों ने उनके शिष्यों, ब्रह्मचारियों और संन्यासियों को घसीट-घसीट कर मारा है. उन्होंने आरोप लगाया कि शादी वर्दी में तैनात पुलिसवालों के जरिए भगदड़ मचाकर उनकी हत्या करने की योजना बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि जब वे वापस लौटने लगे, तब भी पीछे से हमला किया गया, जिससे उनकी आशंका और पुख्ता होती है.

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प्रशासन का पक्ष और शंकराचार्य की मांग

वहीं, मेला प्रशासन का कहना है कि शंकराचार्य बिना अनुमति के लाव-लश्कर के साथ जा रहे थे और उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़ी, जिससे भगदड़ मचने का खतरा था. इस पर शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे पुलिस की मौजूदगी में ही आगे बढ़े थे और पुलिस ने खुद बैरिकेडिंग खोली थी.

शंकराचार्य की शर्तें:

  • प्रशासन उनके घायल शिष्यों से क्षमा याचना करे.
  • उन्हें सादर सम्मान के साथ संगम स्नान कराया जाए.
  • उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे भविष्य में कभी यहां नहीं आएंगे.

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