'हम राहुल गांधी के सिपाही'...AI समिट में शर्टलेस प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब जेल से रिहा, निकलने के बाद ये कहा

Uday Bhanu Chib bail: इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और अन्य कार्यकर्ताओं को मंगलवार देर रात तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया. एआई समिट के दौरान शर्टलेस विरोध प्रदर्शन मामले में अदालत से जमानत मिलने और रिलीज ऑर्डर जारी होने के बाद यह रिहाई हुई है.

Indian Youth Congress Uday Bhanu Chib Release
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Indian Youth Congress Uday Bhanu Chib Release: इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और उनके साथी कार्यकर्ताओं की मंगलवार रात दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहाई हो गई है. जेल से बाहर आने के बाद कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे का स्वागत किया और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया. आपको बता दें कि 20 फरवरी AI समिट 2026 के दौरान दिल्ली स्थित भारत मंडपम में इंडियन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रदर्शन किया था. इस दौरान IYC के कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए थे.

हम राहुल गांधी के सिपाही हैं- चिब

जेल से बाहर आते ही उदय भानु चिब ने मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस डरने वाली नहीं है. चिब ने कहा, 'हम राहुल गांधी के सिपाही हैं. किसी भी तरह के दबाव या दमन से हम पीछे हटने वाले नहीं हैं. भारत विरोधी इंडिया-यूएस अंतरिम ट्रेड डील के खिलाफ युवा कांग्रेस की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.' चिब का कहना है कि इंडिया-यूएस व्यापार समझौता से देश के किसानों और आम नागरिकों के हितों को नुकसान पहुंचेगा.

जमानत के साथ जोड़ी गईं ये शर्तें

उदय भानु चिब को 28 फरवरी को ही जमानत मिल गई थी जबकि अन्य 9 साथियों को 1 मार्च को राहत मिली. दिल्ली पुलिस द्वारा वेरिफिकेशन रिपोर्ट जमा करने के बाद मंगलवार रात को रिहाई का आदेश जारी हुआ. युवा कांग्रेस की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया ने बताया कि जमानत के साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी गई हैं. जैसे किसी भी यात्रा पर जाने से पहले कोर्ट को जानकारी देनी होगी और जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा.

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लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का दावा

युवा कांग्रेस के अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया ने इस रिहाई को लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की जीत करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह दिन उन लोगों के लिए खास है जो देश की संसदीय प्रणाली में अटूट विश्वास रखते हैं. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया था, लेकिन न्यायपालिका के इस फैसले से कानून व्यवस्था में उनका भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है.

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