इंदौर में दूषित पानी का कहर: 27वीं मौत के बाद सड़क पर उतरा गुस्सा, शव रखकर चक्काजाम, न्याय की गुहार
Indore water crisis news: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है. 27वीं मौत के बाद लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा, परिजनों ने शव रखकर चक्काजाम किया और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई. कांग्रेस ने नगर निगम और सरकार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए इस्तीफे और मुआवजे की मांग की है.

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इलाके में एक और बुजुर्ग बद्री प्रसाद की मौत के बाद शनिवार को स्थानीय लोगों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. प्रशासन की लापरवाही के विरोध में लोगों ने भागीरथपुरा पुलिया पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई.
एक ही परिवार में दो मौतें
मृतक बद्री प्रसाद के परिजनों का आरोप है कि दूषित पानी के कारण उन्हें गंभीर उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी. पहले उन्हें एमवाई अस्पताल और फिर अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. परिजनों का कहना है कि इसी घर में एक महीने के भीतर यह दूसरी मौत है, लेकिन प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अब तक सुध लेने नहीं पहुंचा.
कांग्रेस का हल्ला बोल: 'इस्तीफा दें महापौर और मंत्री'
चक्काजाम की सूचना मिलते ही शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे समेत कई नेता मौके पर पहुंचे. कांग्रेस ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए. साथ ही, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने और महापौर व संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई. कांग्रेस नेताओं ने सरकार को 'अहंकारी' बताते हुए कहा कि प्रशासन केवल आयोजनों में व्यस्त है और जनता मर रही है.
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चक्काजाम और प्रशासन का आश्वासन
करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद एसडीएम, एसीपी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा. अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की. एसडीएम ने परिजनों की मांगों को सुना और सीएमएचओ (CMHO) से बात कर आर्थिक सहायता और मामले की जांच का आश्वासन दिया. प्रशासन के भरोसे के बाद ही लोगों ने चक्काजाम समाप्त किया.
अब तक 27 लोगों की मौत का दावा
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने की वजह से अब तक कुल 27 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है. इस मामले ने पूरे शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि प्रशासन मुआवजे की लिस्ट में कुछ नामों को लेकर संशय जता रहा है, लेकिन लगातार होती मौतें शहर के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं.
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