Shesh Bharat: BMC चुनाव में अन्नामलाई का बयान बीजेपी के लिए बना सिरदर्द, राज ठाकरे ने लगाई क्लास!
आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अन्नामलाई को बीजेपी ने तमिलनाडु में बड़ा चेहरा बनाया है. लेकिन चुनावी हार, AIADMK से टकराव और मुंबई में दिए बयान ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है.

कर्नाटक कैडर के आईपीएस अफसर अन्नामलाई बड़ी जवानी में करियर छोड़कर राजनीति में आए. ऐसे राज्य में बीजेपी ज्वाइन की जहां पार्टी का कुछ हो नहीं रहा. तमिलनाडु में अरसे से कुछ बड़ा करने की ताक में बैठी बीजेपी के लिए कुप्पुस्वामी अन्नामलाई बड़ी उम्मीद बनकर आए. आईपीएस अफसर से सीधे प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बने. बीजेपी अन्नामलाई पर इतनी निर्भर हुई कि वही अलायंस, इलेक्शन स्ट्रैटजी डिसाइड करने लगे. 2024 का मेगा लोकसभा चुनाव अन्नामलाई की लीडरशिप में बीजेपी लड़ी लेकिन रिजल्ट आया तो पार्टी जीरो से जीरो पर रही. अचानक अन्नामलाई साइडलाइन होने लगे. प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़कर मेंटॉर जैसे रोल में आ गए. विधानसभा चुनाव में भी अन्नामलाई फ्रंट पर हैं लेकिन पार्टी उनके कहने पर चलती नहीं दिखती.
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक घमासान पीक पर हैं. अचानक अन्नामलाई को लेकर महाभारत छिड़ी है लेकिन तमिलनाडु में नहीं, मुंबई में जहां बीएमसी का चुनाव हो रहा है. अन्नामलाई के चेहरे पर दक्षिण भारतीय पट जाएंगे, यही सोचकर पार्टी ने मुंबई में धारावी जैसे तमिल बहुल इलाकों में भेजा लेकिन वहां जाते कांड हो गया.
अन्नामलाई ने बड़बोले बनकर कहा मुंबई को बंबई कहने लगे. कहा कि बंबई सिर्फ महाराष्ट्र का शहर नहीं है, बल्कि एक इंटरनेशनल सीटी है. बीएमसी के चुनाव में मराठी अस्मिता फिर मुद्दा बना है. ऐसे में अन्नामलाई का मुंबई ज्ञान बीजेपी को भयंकर बैकफायर कर रहा है. गुस्साए राज ठाकरे ने रसमलाई बोलकर मजाक उड़ाया. लात मारने की बात बोली. गाली गलौज कर दिया. 60 के दशक में बंबई में दक्षिण के लोगों के खिलाफ लगने वाला नारा हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी को फिर से लगाने लगे. ठाकरे कैंप ने बीजेपी के खिलाफ कैंपेन छेड़ दिया कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश हो रही है.
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अन्नामलाई के बयानों से बीजेपी बैकफुट पर है. सीएम देवेंद्र फडणवीस कमजोर हिंदी का लॉजिक देकर इग्नोर करने की बात कर रहे हैं लेकिन डिप्टी सीएम और बीजेपी के सहयोगी एकनाथ शिंदे को भी अन्नामलाई की भाषणबाजी एकदम पसंद नहीं आई. चाहते तो चुप रह जाते लेकिन सामने से आकर कहा कि गलत बोला. बीजेपी, शिवसेना की चिंता ये है कि मुंबई में करीब 4 परसेंट तमिल वोट बैंक माना जाता है. इतने वोट बैंक के चक्कर में कहीं कोर मराठी वोट बैंक नाराज न हो जाए.
आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अन्नामलाई ने तमिलनाडु में बीजेपी के लिए ऐसी लाइन चुनी जो डीएमके, AIADMK की कोर पॉलिटिक्स रही है. उन्होंने बीजेपी की अलग पहचान बनाने के लिए द्रविड़ पॉलिटिक्स को निशाना बनाया. AIADMK के आईकन सीएन अन्नादुरै, जयललिता जैसे नेताओं के खिलाफ बोलना शुरू किया जो AIADMK के लिए ये बर्दाश्त से बाहर था. AIADMK ने बीजेपी के सामने शर्त रख दी या तो हम या अन्नामलाई. बीजेपी ने AIADMK को चुना.
तमिलनाडु में बीजेपी सीटें जीतने के मामले में अच्छा नहीं कर रही लेकिन वोट शेयर बढ़ रहा है. इसका क्रेडिट अन्नामलाई की अग्रेसिव पॉलिटिक्स और उनकी न मन, एन मक्कल पदयात्रा को दिया जाता है जो उन्होंने पूरे तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव से पहले निकाली थी. 6 महीने की एन मन एन मक्कल नाम की पदयात्रा शुरू कराने अमित शाह आए थे. 1770 किलोमीटर की पदयात्रा में 234 विधानसभा सीटें कवर किया था अन्नामलाई ने. इसके बाद पहली बार बीजेपी को वोट शेयर 11 परसेंट के पार गया. यही ग्रोथ बीजेपी के लिए उम्मीद की किरण है कि लगे रहे तो तमिलनाडु में भी छा जाएंगे.
कुप्पुस्वामी अन्नामलाई बीजेपी को पहली बार बैकफायर नहीं कर रहे. 2021 में सिर्फ 37 साल की उम्र तमिलनाडु बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था. तब पार्टी का AIADMK के साथ अलायंस चल रहा था. अन्नामलाई ने हाईकमान को समझाया कि अलायंस के साथ नहीं, अकेले लड़ने से पार्टी का फायदा होगा. तब पार्टी ने AIADMK से अलायंस तोड़ दिया लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई खुद भी हारे पार्टी भी हारी. फिर पार्टी ने अन्नामलाई को साइड करके AIADMK से फिर अलायंस जोड़ा.
विजय पर भी अन्नामलाई एकदम फायर रहते हैं. वीक एंड पॉलिटिशियन बोलकर निशाना साध चुके हैं जबकि कहा जा रहा है कि बीजेपी पूरी कोशिश कर रही है कि चुनाव से पहले विजय को अपने साइड लाया जाए लेकिन ये मिशन अब तक सक्सेसफुल हो नहीं पाया. बिहार में एनडीए की हार और प्रशांत किशोर की हार के बाद भी अन्नामलाई को विजय को चेताया कि बीजेपी का ऑपोजिशन कोई बिजनेस नहीं है. अगर इस विरोध को बिजनेस बनाया तो प्रशांत किशोर जैसे चुनाव हारना ही होगा.
कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि अन्नामलाई में टैलेंट तो कूट कूट कर भरा है. राजनीति जमाने में जरा दिक्कत चल रही है. तमिलनाडु के करूर के किसान परिवार के बेटे ने जिंदगी ने अब तक जो चाहा वो मिलता गया. पारिवारिक खेती बाड़ी छोड़कर इंजीनियरिंग की. बीटेक करने के बाद आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया. 2011 में सिविल सर्विसेज क्वालिफाई करके आईपीएस बन गए. कर्नाटक कैडर के आईपीएस अफसर होते हुए चिकमंगलूर, उडुपी के एसपी रहे. बेंगलुरू साउथ के डीसीपी रहे. सिर्फ 8 साल आईपीएस रहते कुप्पुस्वामी अन्नामलाई ने सोच कर लिया कि वो पुलिस की नौकरी के लिए नहीं बने हैं. 2019 में आईपीएस छोड़कर राजनीति में आए. 2020 में बीजेपी ज्वाइन की और 11 महीने बाद 2021 में तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष बन गए.
अन्नामलाई पहला विधानसभा चुनाव बीजेपी की टिकट पर अरवाकुरुच्ची सीट से AIADMK के समर्थन से लड़ा था लेकिन डीएमके उम्मीदवार के हाथों हार गए थे. बीजेपी को संभावना दिखी कि अन्नामलाई के तेवर तमिलनाडु में मास्टरस्ट्रोक साबित होंगे जो हो न सका. वैसे तो बीजेपी के लिए पूरा साउथ परमानेंट प्रॉब्लम बना है. कांग्रेस से हारने के बाद एकमात्र कर्नाटक का किला भी हिल चुका है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु-यानी साउथ के पांच राज्यों में बीजेपी प्रचंड मोदी लहर के बाद भी कहीं है नहीं. न मजबूत जनाधार, न मजबूत अलायंस
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