Shesh Bharat: फिल्म अटकी, CBI जांच और चुनाव करीब...राजनीति में एंट्री होते ही क्यों बढ़ीं थलापति विजय की मुश्किलें? जानें पूरा मामला
Thalapathy Vijay :तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय ने जब राजनीति में उतरने का फैसला किया, तभी से विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रहा. उनकी फिल्म जननायकन सेंसर बोर्ड में फंस गई है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, वहीं चुनाव से पहले फिल्म रिलीज होगी या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

Thalapathy Vijay Political Entry: 2015 से कोई फिल्म फ्लॉप नहीं हुई, फिल्मों के लाखों-करोड़ों फैन हैं. फैंस से पूछकर राजनीति में उतरने का फैसला लिया. बस यहीं से थलापति विजय ने राजनीति की शुरूआत की थी. करीब एक साल से थलापति-थलापति...फिल्मों से कही ज्यादा चर्चा राजनीति में हो रही है. चुनाव में सबसे बड़ा सवाल ये बन गया है कि क्या थलापति विजय तमिलनाडु की राजनीति पलट देंगे? चुनावी टेस्ट का नतीजा अगले 3-4 महीने में निकल आएगा जब चुनाव में हार जीत का फैसला होगा. जननायकन का टीजर रिलीज हुआ तो थलापति विजय की आंखें नम हो गईं. उन्होंने फुल टाइम राजनीति करने के लिए पीक पर चल रहे फिल्मी करियर को हमेशा के लिए अलविदा कहा था. तब कहां सोचा कि 9 जनवरी को रिलीज होने वाली जिस फिल्म को उन्होंने फेयरवेल फिल्म माना वो फिल्म रिलीज ही नहीं हो पाएगी. सेंसर बोर्ड ने बिना किसी स्पेस्फिक कारण बताए, सेंसर सर्टिफिकेट रोक दिया. मामला हाईकोर्ट की दो बेंच से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है लेकिन अब पता नहीं जननायकन कब रिलीज होगी.
KVN प्रोडक्शंस की सुप्रीम कोर्ट में याचिका
जननायकन की प्रोड्यूसर कंपनी केवीएन प्रोडक्शंस ने सुप्रीम कोर्ट में फिल्म की रिलीज के लिए याचिका लगाई है. याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. मद्रास हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने पहले आदेश में सेंसर बोर्ड को सेंसर सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था लेकिन सेंसर बोर्ड की अपील पर मद्रास हाईकोर्ट की ही डिवीडन बेंच ने आदेश पलट दिया. अब सेंसर बोर्ड किसी कोर्ट आदेश से सर्टिफिकेट जारी करने के लिए बंधा नहीं है. अब बिना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना जनकायकन की रिलीज नहीं हो सकती. हाईकोर्ट में 21 जनवरी को अगली सुनवाई है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं है. ये भी गौर करने वाली बात है कि सेंसर बोर्ड की ओर से केस लड़ने सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए थे.
चुनाव से पहले रिलीज पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
द वीक की रिपोर्ट का अनुमान है कि हो सकता है कि विजय की आखिरी फिल्म चुनाव से पहले रिलीज ही न हो. जनवरी के आखिरी हफ्ते के बाद चुनाव आयोग कभी भी तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव का एलान कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो फिल्म आदर्श आचार संहिता के लपेटे में आ सकती है. चूंकि जनकायकन विजय की फिल्म है, चुनाव आयोग के पास ये रिव्यू का अधिकार होगा कि कहीं फिल्म राजनीतिक रूप से वोटर्स पर असर तो नहीं डालेगी. चुनाव आयोग के पास भी ये अधिकार होगा कि फिल्म रिलीज होने देनी है या नहीं. तमिलनाडु में ये चर्चा आम है कि विजय की आखिरी फिल्म के विवाद के पीछे जनकायकन नहीं, नायक विजय हैं जो चुनाव के मौके पर अपनी हीरोगीरी टाइप बनाने की तैयारी कर रहे हैं. सेंसर बोर्ड का तो बस बहाना है. विजय की पूरी राजनीति स्टालिन सरकार के खिलाफ है. डीएमके को हराने के लिए विजय ने टीवीके पार्टी बनाई और चुनाव लड़ने जा रहे हैं. लेकिन विवाद बीजेपी वर्सेज विजय बन रही हैं.
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बीजेपी सरकार पर डीएमके का सीधा हमला
विजय की फिल्म की रिलीज नहीं होने में फायदा डीएमके का भी है लेकिन सीएम स्टालिन इस मामले में विजय के समर्थन करते दिखे. बिना विजय की फंसी हुई फिल्म जनकायकन का जिक्र किए उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा कि सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स के बाद सेंसर बोर्ड बीजेपी सरकार का नया हथियार बना है. डीएमके का दावा है कि इस विवाद के पीछे बीजेपी का हाथ है जो अलायंस करने के लिए विजय पर दवाब बना रही है. विजय के सहानुभूति में डीएमके का फायदा बस इतना है कि बीजेपी को कोसने का मौका मिल रहा है. चुनावी राजनीति में विजय कभी भी डीएमके के लिए सॉफ्ट नहीं हुए हैं. पूरे विवाद में विजय कुछ नहीं बोल रहे. कोई हल्ला नहीं कि किसने क्यों फिल्म रिलीज रोकी. बस कोर्ट में लीगल फाइट कर रही है टीम.
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कांग्रेस से सॉफ्ट कॉर्नर की अंदरखाने चर्चा
विजय में बीजेपी इंटरेस्टेड है-ये बात तमिलनाडु बीजेपी के कई नेताओं ने तो कही लेकिन कहीं किसी ने ये नहीं कहा कि विजय के साथ अलायंस की कोई पहल हुई जिसे विजय ने स्वीकार नहीं किया. विजय की पहले दिन ये पॉलिसी है कि वो किसी से अलायंस नहीं करेंगे. बिना एक भी चुनाव लड़े विजय ने बड़ा सपना देखा है कि तमिलनाडु में सत्ता हासिल करने का. पार्टी ने ऑफिशियली विजय को सीएम उम्मीदवार भी घोषित किया है. हालांकि रह-रहकर ये चर्चा होती रहती है कि कांग्रेस को लेकर विजय सॉफ्ट हैं. अंदरखाने कुछ बातचीत भी हुई है. करूर हादसे के बाद राहुल गांधी ने फोन करके विजय को समर्थन दिया था.
CBI जांच शुरू, दिल्ली तलब किए गए विजय
सितंबर में करूर रैली में हादसे में 41 लोगों की मौत के बाद से विजय के चुनाव प्रचार का पहिया थमा हुआ है. उन्होंने पुद्दुचेरी जाकर रैली की लेकिन तमिलनाडु में चुनाव प्रचार कायदे से शुरू नहीं हो पाया. करूर हादसे में भी विजय ने साजिश का एंगल देखा. खुद सीबीआई जांच की मांग की. जबकि तमिलनाडु सरकार ने सीबीआई जांच का विरोध किया. सीबीआई जांच शुरू हो गई. पूछताछ के लिए विजय को सीबीआई ने दिल्ली ऑफिस बुलाया. चेन्नई से चार्टर्ड फ्लाइट से सुबह 7 बजे दिल्ली पहुंचे विजय और पूरा दिन सीबीआई हेडक्वार्टर में रहे.
CBI ने रैली की प्लानिंग पर पूछे तीखे सवाल
विजय से सीबीआई ने पूछा कि हादसे वाले रैली ग्राउंड पर 7 घंटे देर से क्यों पहुंचे. कैसे भीड़ 10 हजार के अनुमान से बढ़कर करीब 30 हजार तक पहुंच गई. करूर में रैली फैसला किस लेवल पर हुआ? आयोजन की योजना किसने बनाई और विजय को जानकारी कब मिली? भगदड़ की जानकारी कब कैसे मिली और उन्होंने क्या किया. रैली से पहले कोई रिस्क असेसमेंट हुआ था या नहीं. लोगों के लिए पीने के पानी, प्रवेश-निकास के रास्तों बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम था या नहीं.
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