जोधपुर: साध्वी साध्वी प्रेम बाईसा केस में बड़ा मोड़, FSL रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा!
जोधपुर की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत पर आई एफएसएल रिपोर्ट में ज़हर के कोई सबूत नहीं मिले हैं. अब मेडिकल बोर्ड से अंतिम राय ली जाएगी. इंजेक्शन लिखने वाले डॉक्टर को लेकर सवाल बने हुए हैं.

Sadhvi Prem Baisa: राजस्थान की मशहूर कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. जोधपुर पुलिस को एफएसएल (FSL) रिपोर्ट मिल गई है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट में किसी भी तरह के जहर या अप्राकृतिक तत्व की पुष्टि नहीं हुई है. अब यह रिपोर्ट उस मेडिकल बोर्ड को भेजी जाएगी, जिसने साध्वी का पोस्टमार्टम किया था. डॉक्टरों की अंतिम राय (Final Opinion) के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी.
SIT को क्या मिला रिपोर्ट में?
एसआईटी (SIT) प्रभारी छवि शर्मा ने बताया कि एफएसएल रिपोर्ट को डॉक्टरों के पैनल के पास भेजा जा रहा है. 28 जनवरी को जब साध्वी को अस्पताल ले जाया गया था, तब उनके नाखून नीले पड़ने की बात सामने आई थी. इस वजह से जहर दिए जाने या जहर खाने का शक जताया जा रहा था, लेकिन एफएसएल जांच ने फिलहाल इस थ्योरी को खारिज कर दिया है.
क्या अस्थमा अटैक बना मौत का कारण?
साध्वी के पिता और अन्य लोगों से एसआईटी को जानकारी मिली थी कि उनको अस्थमा की परेशानी थी. अब यह तथ्य सामने आ रहा है कि क्या मृत्यु का कारण अस्थमा अटैक था. क्योंकि साध्वी के सेवादार सुरेश और भोमाराम ने बताया था कि उनको सांस की परेशानी थी. नर्सिंग कर्मी देवीसिंह राजपुरोहित ने भी उनको dexona इंजेक्शन लगाया था, जिससे अस्थमा की परेशानी में आराम मिलता है. संभवत इंजेक्शन के बाद भी साध्वी की अस्थमा अटैक आया हो, क्योंकि जब उनको अस्पताल ले जाया जा रहा था तब उनकी सांसे उखड़ रही थी.
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पहेली बना हुआ है इंजेक्शन का पर्चा
पुलिस के सामने अभी भी एक बड़ा सवाल खड़ा है. नर्सिंग कर्मी देवीसिंह ने बताया कि उसने साध्वी के पास मौजूद एक पर्ची के आधार पर इंजेक्शन लगाए थे. लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस 'प्रेक्षा अस्पताल' के डॉक्टर का नाम सामने आ रहा था, उन्होंने काफी समय से साध्वी का इलाज करने से इनकार किया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर वह इंजेक्शन किसने और कब लिखे थे.
क्या था पूरा मामला?
बता दें 28 जनवरी को जोधपुर के आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. इसके बाद उनके पिता बिरमनाथ की शिकायत पर FIR दर्ज की गई और 29 जनवरी को पोस्टमार्टम हुआ था. 2 फरवरी को विसरा जांच के लिए भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट अब सामने आई है.










