'छवि खराब करने की साजिश...', माघ मेले से बैन करने के नोटिस पर भावुक हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती!

Magh Mela ban notice: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद और गहरा गया है. मेला प्राधिकरण द्वारा मेले से बैन करने की चेतावनी वाले नोटिस पर शंकराचार्य भावुक हो गए और इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया. नोटिस में मौनी अमावस्या पर बैरिकेडिंग तोड़ने के आरोप लगाए गए हैं. जानिए पूरा विवाद और नोटिस में क्या कहा गया.

Swami Avimukteshwaranand controversy
मेले से बैन करने के नोटिस के बाद भावुक हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद  थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब यब विवाद और भी गहरा गया है. मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस थमा दिया है, जिसमें उन्हें मेला क्षेत्र से ही बैन करने की चेतावनी दी गई है. इस नए नोटिस पर शंकराचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अपनी छवि धूमिल करने की एक बड़ी साजिश बताया है. आइए विस्तार से जानते हैं अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या-कुछ कहा और अब तक के विवाद की पूरी कहानी.

मेला क्षेत्र से हमेशा के लिए बाहर करने की चेतावनी

प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी यह नया नोटिस 18 जनवरी की तारीख का है, जिसे शिविर के गेट पर चस्पा किया गया है. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग और पीपे का पुल तोड़ने की कोशिश की, जिससे भगदड़ मच सकती थी. प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है और पूछा है कि क्यों न उनका भूमि आवंटन निरस्त कर दिया जाए और उन्हें भविष्य में मेले में आने से रोक दिया जाए.

"आपकी सत्ता है, जो चाहे कर दो..."

नोटिस की जानकारी मिलने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भावुक हो गए. उन्होंने कहा, 'शासन और प्रशासन आपके हाथ में है, आप जो चाहें कर दें. यह सब केवल समाज में मेरी छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है ताकि लोगों को लगे कि मैं कोई गड़बड़ आदमी हूं. नोटिस पर नोटिस भेजकर माहौल को अपने अनुकूल बनाने की कोशिश हो रही है.' उन्होंने स्पष्ट किया कि 21 जनवरी की रात तक उन्हें इस नोटिस की कोई जानकारी नहीं थी.

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पहले नोटिस पर दिया 8 पन्नों का जवाब

इससे पहले 19 जनवरी को प्रशासन ने उनके शंकराचार्य होने की वैधता पर सवाल उठाते हुए नोटिस भेजा था. इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजा है. जवाब में कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था और उनका अभिषेक पूरी तरह वैध है. उन्होंने प्रशासन के नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर और असंवैधानिक करार दिया है.

मौनी अमावस्या का स्नान अब भी अधूरा

शंकराचार्य ने कहा कि उनका मौनी अमावस्या का स्नान अभी संपन्न नहीं हुआ है क्योंकि मार्ग में कई बाधाएं उत्पन्न की गईं. उन्होंने इशारों में साफ कर दिया है कि जब तक ये बाधाएं दूर नहीं होंगी और वे संगम तक विधिवत नहीं पहुंचेंगे, तब तक उनका अनुष्ठान मुकम्मल नहीं माना जाएगा. फिलहाल, वे अपने शिविर के बाहर धरने पर डटे हुए हैं और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. वहीं दूसरी ओर प्रयागराज में अब बसंत पंचमी के स्नान की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच यह रार कम होने का नाम नहीं ले रही है.

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