'वो शंकराचार्य ही नहीं हैं...' स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर अखिल भारतीय संत समिति का बड़ा हमला, छिड़ा नया विवाद

Swami Avimukteshwaranand News: प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर विवाद अब और भी गहरा गया है. अखिल भारतीय संत समिति ने उन पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि वे असली शंकराचार्य नहीं हैं और नेगेटिव पब्लिसिटी के लिए अपने शिष्यों को आगे करते हैं. जानिए पूरे विवाद की पूरी कहानी.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शंकराचार्य का विवाद और गहराया
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प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच जारी गतिरोध ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. एक तरफ जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में धरने पर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ अखिल भारतीय संत समिति ने उनके 'शंकराचार्य' होने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. अब इस बवाल ने एक नया ही रूप ले लिया है. आइए विस्तार से जानते हैं अखिल भारतीय संत समिति ने उन्हें लेकर क्या कुछ कहा है और साथ ही विवाद की पूरी कहानी.

"नेगेटिव पब्लिसिटी के लिए बटुकों को बनाते हैं ढाल"

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने वाराणसी में एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद असली शंकराचार्य नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हमेशा मासूम बटुकों (शिष्यों) को अपनी नेगेटिव पब्लिसिटी के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने 2015 के लाठीचार्ज की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने बच्चों को आगे कर दिया था और अब माघ मेले में भी उन्होंने जबरदस्ती सुरक्षित पुल की बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की.

असली शंकराचार्य कौन? प्रशासन ने मांगा जवाब

इस विवाद के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस थमा दिया है. इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का हवाला देते हुए उनसे पूछा गया है कि वह किस आधार पर खुद को शंकराचार्य बता रहे हैं. प्रशासन ने उनके पद की वैधता पर जवाब मांगा है, जिससे संत समाज में हलचल तेज हो गई है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार

प्रशासन के नोटिस का जवाब देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ए.के. मिश्रा ने 8 पन्नों का स्पष्टीकरण भेजा है. जवाब में कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था और 12 सितंबर 2022 को उनका विधिवत अभिषेक हुआ था. उनके पक्ष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके पद पर कोई रोक नहीं लगाई है और नोटिस भेजना कोर्ट की कार्यवाही में दखल देने जैसा है.

मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था?

पूरा विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ. आरोप है कि जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने लाव-लश्कर के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब पुलिस ने भीड़ का हवाला देकर उनके रथ को रोकने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कुछ शिष्यों को चोटें आईं. इसके बाद से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं और पुलिस कमिश्नर सहित बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

इस विवाद में अब राजनीतिक एंट्री भी हो चुकी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात कर उनका समर्थन किया है, जिसके बाद विपक्ष योगी सरकार और यूपी पुलिस पर हमलावर है.

यहां देखें वीडियो

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