महोबा में भिड़े बीजेपी मंत्री और विधायक, सड़क पर हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा, घटना का वीडियो वायरल
यूपी के महोबा में बीजेपी की अंदरूनी रार सड़क पर आ गई. जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच तीखी झड़प हुई. विधायक ने सड़कों की बदहाली और जमीनों पर कब्जे का आरोप लगाते हुए मंत्री का रास्ता रोका. देखते ही देखते समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे हड़कंप मच गया.

Swatantra Dev Singh vs Brijbhushan Rajput: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में उस वक्त सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया जब योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आ गए. रामश महाविद्यालय के पास हुआ यह विवाद इतना बढ़ गया कि मंत्री के काफिले को रोकना पड़ा और पुलिस को बीच बचाव के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. सड़कों की बदहाली पर भड़के विधायक घटना उस समय की है जब कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह युवा उद्घोष कार्यक्रम से लौट रहे थे.
इस दरौन चरखारी विधानसभा से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत अपने सैकड़ों समर्थकों और ग्राम प्रधानों के साथ वहां पहुंच गए. विधायक का आरोप था कि जल जीवन मिशन के तहत उनके क्षेत्र की सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है, जिससे जनता परेशान है. उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों और व्यवस्था पर अनदेखी का आरोप लगाया.
तीखी बहस का वीडियो वायरल
मंत्री और विधायक के बीच तीखी बहस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विधायक बृजभूषण राजपूत बेहद गुस्से में थे. उन्होंने मंत्री के सामने ही 'कब्जे' और 'आत्महत्या' जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल किया. विधायक ने कहा कि उनके भाई तक परेशान हैं और जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं. जवाब में स्वतंत्र देव सिंह ने भी मोर्चा संभालते हुए चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में इतनी समस्या है तो चलिए अभी उन गांवों का दौरा करते हैं. इस बहस ने माहौल को और ज्यादा गर्मा दिया.
यह भी पढ़ें...
पुलिस से भिड़े समर्थक
अफरा-तफरी का माहौल बहस बढ़ते देख विधायक के समर्थकों ने मंत्री का रास्ता रोक लिया. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सीओ सदर और कोतवाल को भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभालना पड़ा. इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई. कुछ देर के लिए इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. विधायक समर्थकों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
पार्टी के लिए असहज स्थिति महोबा की इस घटना ने साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर बीजेपी के भीतर असंतोष गहरा है. एक तरफ सरकार विकास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने ही विधायक बुनियादी सुविधाओं और भ्रष्टाचार को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं. अब देखना यह है कि पार्टी हाईकमान इस खुले विद्रोह पर क्या रुख अपनाता है.
यह भी पढ़ें: मॉडलिंग का शौक रखने वाली तन्नू को पति राहुल का मजाक ऐसा खटका कि फंदे से झूल गई










