बीजेपी में आर-पार! स्वतंत्र देव सिंह की गाड़ी रोकी, 20 दिन का अल्टीमेटम; जानिए कौन हैं बवाली विधायक?

बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत ने जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का रास्ता रोककर विकास कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अयोध्या में केशव मौर्य के सामने पार्टी नेता आपस में भिड़ गए.

बृजभूषण राजपूत
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यूपी की सियासत में इन दिनों बीजेपी के भीतर ही घमासान मचा हुआ है. महोबा के चरखारी से बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत ने योगी सरकार के कद्दावर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का रास्ता रोककर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. वहीं अयोध्या में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में बीजेपी नेता आपस में भिड़ गए, जिससे पार्टी के भीतर के अंतर्कलह को हवा मिल रही है.

मंत्री का रास्ता रोक भड़के विधायक

महोबा जिले में जब जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो विधायक बृजभूषण राजपूत ने दर्जनों ग्राम प्रधानों के साथ उनकी गाड़ी रोक ली. विधायक का आरोप है कि 'हर घर नल जल योजना' और 'नमामि गंगे' के कारण पिछले 6 साल से गांव-गांव में सड़कें खोदी गई हैं, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है. मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे मौके पर जाकर जांच करेंगे और लापरवाही मिलने पर अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड करेंगे.

कौन हैं बृजभूषण राजपूत?

चरखारी से दूसरी बार विधायक चुने गए बृजभूषण राजपूत लोधी बिरादरी से आते हैं और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत के पुत्र हैं. बृजभूषण अपने विवादित बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहे हैं. इससे पहले वे लखनऊ में एक मुस्लिम सब्जी वाले के साथ बदसलूकी और हज यात्रा रोकने जैसे बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं [06:44]. उनके पिता भी राजनीति में काफी आक्रामक माने जाते रहे हैं.

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अयोध्या में मंच पर हाथापाई

बीजेपी के भीतर बवाल की एक और तस्वीर अयोध्या से आई. यहां पूर्व विधायक खब्बू तिवारी की मां के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे डिप्टी सीएम केशव मौर्य के सामने बीजेपी के जिलाध्यक्ष संजीव सिंह और नेता सच्चिदानंद पांडे आपस में भिड़ गए. मंच पर ही धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई, जिसे सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह शांत कराया.

इटावा में मजार पर 'बुलडोजर' की आहट

अखिलेश यादव के गढ़ इटावा में लायन सफारी के पास स्थित 'बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार' प्रशासन के निशाने पर है. आरोप है कि यह मजार वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई है. मजार कमेटी ने स्वीकार किया है कि उनके पास जमीन के वैध कागजात नहीं हैं, जिसके बाद अब इस पर बुलडोजर चलने की संभावना बढ़ गई है.

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