कौन हैं सौम्या अग्रवाल, जिनकी तस्वीर दिखाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लगाएं कई आरोप

प्रयागराज की घटना को लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों पर मारपीट, लापरवाही और भ्रामक जानकारी देने के गंभीर आरोप लगे हैं, जबकि प्रशासन ने इन्हें नकारते हुए कार्रवाई को भीड़ नियंत्रण से जुड़ा बताया है.

स्वामी अवीमुक्तेश्वानंद
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प्रयागराज में हाल ही में हुई एक घटना को लेकर प्रशासन और साधु-संतों से जुड़े लोगों के बीच विवाद गहराता दिख रहा है. सामने आए बयानों और कथित वीडियो क्लिप्स के आधार पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

इसी दौरान अनशन पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाते हुए कहा कि मौके पर मौजूद बड़े अफसर हालात संभालने के बजाय तमाशबीन बने रहे जबकि कुछ पर सीधे तौर पर मारपीट में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं.

कमिश्नर पर गलत जानकारी देने का आरोप

आरोपों के केंद्र में प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल का नाम लिया जा रहा है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने कहा कि घटना के दौरान वो वहीं मौके पर मौजूद थीं और अगर वो चाहतीं तो सम्मानजनक तरीके से स्थिति को शांत कराया जा सकता था.

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उन्होंने आगे कहा कि लगभग ढाई घंटे तक उनके लोगों के साथ मारपीट होती रही और कमिश्नर ने वहां मौजूद रहते हुए भी हस्तक्षेप नहीं किया. इसके साथ शंकराचार्य ने ही प्रेस को कथित तौर पर भ्रामक और गलत जानकारी देने का आरोप भी लगाया गया है. हालांकि ये सभी बातें आरोपों के दायरे में हैं और प्रशासन की तरफ से इसे सिरे से खारिज किया गया है.

कौन हैं सौम्या अग्रवाल 

साल 2025 में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सूबे के 16 वरिष्ठ IAS अधिकारियों का तबादला कर दिया था. इन्ही में से एक थीं IAS सौम्या अग्रवाल. सौम्या अग्रवाल को प्रयागराज का कमिश्नर बनाया गया था. सौम्या लखनऊ की हैं, वहीं उनका पूरा बचपन बीता है. लखनऊ से ही उन्होंने सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की है.

उनके पिता ज्ञानचंद अग्रवाल रेलवे में सिविल इंजीनियर थे. स्कूल पूरी करने के बाद सौम्या ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. वो पुणें की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगी. कंपनी ने कुछ महीने के बाद ही सौम्या अग्रवाल को एक प्रोजेक्ट के लिए  लंदन भेज दिया. जहां वो दो साल रहीं और देश वापस आ गई. 

भारत आने के बाद सौम्या ने लखनऊ में रहते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का मन बनाया लिया था. साल भर की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में 24वीं रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा पास कर ली थी. 

गृह सचिव पर सीधे हाथ से मारने के आरोप

एक अन्य गंभीर आरोप उत्तर प्रदेश के गृह सचिव स्तर के अधिकारी मोहित गुप्ता पर लगाया गया है. शंकराचार्य का कहना है कि उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि सादे कपड़ों में मौजूद यह अधिकारी साधु-संतों और युवकों को पकड़कर मार रहे थे. 

शंकराचार्य ने ये भी दावा किया कि कुछ टीवी चैनलों के फुटेज में भी कथित तौर पर यह दृश्य दिखा है. आरोप यह भी है कि घटना के दौरान फोन पर लगातार किसी 'ऊपर' बैठे व्यक्ति से निर्देश लिए जा रहे थे और पूरी कार्रवाई लाइव मॉनिटर की जा रही थी. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

पुलिस आयुक्त पर हठधर्मिता का आरोप

शंकराचार्य ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त योगेंद्र कुमार पर भी आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि घटना के दौरान मौके पर सबसे सख्त और टकराव वाला रवैया उन्हीं का था. आरोप है कि अनाउंसमेंट के जरिए लोगों को उकसाया गया और बातचीत के रास्ते बंद कर दिए गए. वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन का कहना है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा कारणों से सख्ती जरूरी थी.

नियमों के तहत कार्रवाई

प्रशासन की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने साफ किया कि किसी भी साधु-संत या श्रद्धालु का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था. उनका कहना है कि आपत्ति केवल वाहनों के साथ संगम नोज तक जाने को लेकर थी. अधिकारियों के मुताबिक उस समय भीड़ काफी ज्यादा थी, इसलिए किसी भी तरह के वाहन को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी. पुलिस का दावा है कि अगर मारपीट से जुड़े आरोपों के समर्थन में कोई सीसीटीवी या सामान्य वीडियो सामने आता है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. विपक्षी दलों ने वीडियो और आरोपों के आधार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला बता रहे हैं. फिलहाल पूरा घटनाक्रम आरोप-प्रत्यारोप के बीच फंसा है और सभी की निगाहें संभावित जांच और सामने आने वाले सबूतों पर टिकी हैं.

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