कौन हैं रितेश्वर महाराज? जिनकी 'राष्ट्रकथा' सुनकर मंच पर ही रोने लगे बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह

Who is Riteshvar Maharaj: गोंडा में सद्गुरु रितेश्वर महाराज की राष्ट्रकथा के दौरान उनके ‘दबदबा’ वाले शब्द सुनकर बृजभूषण शरण सिंह मंच पर भावुक होकर रो पड़े. मेडिकल की पढ़ाई छोड़ साधु बने रितेश्वर महाराज युवाओं के बीच राष्ट्रप्रेरणा और सामाजिक मुद्दों को लेकर खास पहचान रखते हैं.

रितेश्वर महाराज
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Gonda News: भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को लोग आमतौर पर सख्त मिजाज और दो-टूक बोलने वाले नेता के रूप में जानते हैं. लेकिन गोंडा के नंदिनी नगर में हाल ही में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को चौंका दिया. मंच पर बैठे बृजभूषण अचानक भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. वजह बने प्रसिद्ध कथावाचक सद्गुरु रितेश्वर महाराज के शब्द.

जब ‘दबदबा’ वाली बात ने छू लिया दिल

कथा के दौरान रितेश्वर महाराज ने मंच से हल्के व्यंग्य भरे अंदाज में कहा, “गोंडा में लोग कहते हैं- दबदबा था, दबदबा है… तो भाई, यहां इनका बाप बैठा है, उसका भी दबदबा था, है और रहेगा.”

ये सुनते ही बृजभूषण शरण सिंह का गला भर आया. वही बृजभूषण, जिनका ‘दबदबा था, है और रहेगा’ वाला बयान कभी काफी चर्चा में रहा था, आज उसी बात पर खुद को संभाल नहीं पाए और सबके सामने रो पड़े.

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आखिर कौन हैं रितेश्वर महाराज?

रितेश्वर महाराज आज के दौर के चर्चित कथाकारों में से एक हैं. वह सिर्फ धार्मिक प्रवचन नहीं देते, बल्कि खुद को ‘राष्ट्रकथा’ का प्रचारक मानते हैं. मेडिकल छोड़कर साधु बने: उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी और फिर अध्यात्म के रास्ते पर चल पड़े.

  • धर्मदंड उनकी पहचान: उनके हाथ में हमेशा एक खास ‘धर्मदंड’ रहता है. उसमें 9 और 8 डंडियां लगी होती हैं, जिन्हें वे नौ ग्रह और आठ सिद्धियों का प्रतीक बताते हैं.
  • राष्ट्रकथा का अंदाज: उनकी कथाएं मंदिर तक सीमित नहीं होतीं. वह युवाओं को देशप्रेम, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं.
  • किसी वाद में नहीं बंधे: वह खुद को किसी खास विचारधारा या कट्टर सोच से दूर रखते हैं. उनका कहना है कि मानवता और राष्ट्र सबसे ऊपर हैं.

युवाओं के दिलों में खास जगह

रितेश्वर महाराज की युवाओं के बीच जबरदस्त पकड़ है. यही वजह है कि गोंडा की इस कथा में हजारों लोग जुटे थे. खुद बृजभूषण शरण सिंह भी उन्हें एक प्रेरक व्यक्तित्व मानते हैं. नंदिनी नगर की इस ‘राष्ट्रकथा’ ने सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा पल दे दिया, जिसमें बाहुबली छवि वाले नेता भी खुद को रोक नहीं पाए और भावनाओं में बह गए.

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