Union Budget 2026: बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए हो सकता है बड़ा ऐलान, बुजुर्गों के लिए रेल यात्रा में फिर शुरू हो सकती है रियायत
Budget 2026 में वरिष्ठ नागरिकों मिल सकती है बड़ी खुशखबरी, केंद्र सरकार शताब्दी, राजधानी और एक्सप्रेस ट्रेनों में फिर से 40-50% टिकट छूट (ticket concession)कर सकती है लागू. कोविड के बाद बंद हुई यह छूट बुजुर्ग यात्रियों को वापस मिल सकती है.

Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले आम बजट से पहले रेलवे को लेकर एक बड़ी उम्मीद सामने आ रही है, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए. लंबे समय से बंद पड़ी रेलवे टिकट छूट को फिर से शुरू किया जा सकता है, और अगर ऐसा होता है तो करोड़ों बुजुर्ग यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा. चर्चाओं और रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार शताब्दी, राजधानी और मेल/एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में सीनियर सिटीजन को 40 से 50% तक की छूट देने पर विचार कर रही है.
कोविड-19 महामारी से पहले भारतीय रेलवे वरिष्ठ नागरिकों को टिकट किराए में खास रियायत देती थी. पुरुष यात्रियों को 60 साल की उम्र के बाद 40% और महिलाओं को 58 साल के बाद 50% तक की छूट मिलती थी. यह सुविधा लगभग सभी क्लास में लागू होती थी और टिकट बुक करते समय उम्र डालते ही अपने आप छूट मिल जाती थी, लेकिन मार्च 2020 में कोरोना महामारी के चलते यह सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी. उसके बाद से अब तक इसे दोबारा शुरू नहीं किया गया, लेकिन ऐसी उम्मीद जताई जा रही है की इस बजट में इस संविधा को फिरसे शुरू किया जा सकता है.
रेलवे में बुजुर्गों के लिए छूट की मांग हुई तेज
अब जब महंगाई बढ़ रही है और बुजुर्गों की आमदनी ज्यादातर पेंशन या सीमित बचत पर निर्भर है, तो रेलवे टिकट में छूट की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. वरिष्ठ नागरिकों और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि यात्रा उनके लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है. बच्चों से मिलने, इलाज के लिए या धार्मिक यात्राओं के लिए रेल ही सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन होता है. सूत्रों के अनुसार रेल मंत्रालय ने इस छूट को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा है. बजट से पहले दोनों मंत्रालयों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
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अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो शताब्दी, राजधानी और मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों में सीनियर सिटीजन को सीधे टिकट किराए में राहत मिलेगी. अब सवाल यह है कि क्या इस बजट में रेलवे से जुड़ा यह फैसला लिया जाएगा. चूंकि अब रेल बजट अलग से पेश नहीं होता, इसलिए ऐसे सभी फैसले आम बजट का हिस्सा होते हैं.
रेल बजट में आम लोगों के लिए क्या होगा?
बहुत से लोग यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर रेल बजट को आम बजट में कब और क्यों मिलाया गया. भारत में साल 2017 से रेल बजट को केंद्रीय बजट के साथ पेश किया जा रहा है. 1 फरवरी 2017 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार संयुक्त बजट पेश किया था. इससे पहले हर साल केंद्रीय बजट से कुछ दिन पहले अलग से रेल बजट पेश होता था. यह परंपरा लगभग 1992 साल तक चली.
ब्रिटिश शसनकाल में हुई थी रेल बजट की शुरूआत
- दरअसल अलग रेल बजट की शुरुआत 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी.
- उस समय एक्वर्थ कमेटी की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया था.
- उस दौर में भारतीय रेलवे सरकार के कुल खर्च का करीब 84 प्रतिशत हिस्सा हुआ करता था.
पहले रेलवे का था आर्थिक दबदबा
रेलवे का आर्थिक दबदबा इतना ज्यादा था कि उसे सामान्य बजट में संभालना मुश्किल माना जाता था. आजादी से पहले रेलवे भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी. माल ढुलाई, यात्रा, सैन्य जरूरतें और सरकार की बड़ी आमदनी रेलवे से ही आती थी. इसी वजह से रेलवे के लिए अलग बजट बनाना जरूरी समझा गया, लेकिन समय के साथ हालात बदले. देश की अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ा, नए सेक्टर सामने आए और रेलवे का कुल बजट में हिस्सा धीरे-धीरे कम होता चला गया.
फिर रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया गया
2016 तक रेलवे कुल सरकारी खर्च का सिर्फ करीब 15 प्रतिशत रह गया था. ऐसे में अलग रेल बजट बनाए रखने का कोई खास मतलब नहीं रह गया. 2016 में नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली एक समिति ने सिफारिश की कि रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया जाए. सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया और पारदर्शिता, सरलता और बेहतर वित्तीय प्रबंधन को इसकी वजह बताया गया.
मर्जर से फायदा हुआ या घाटा?
- इस मर्जर के बाद रेलवे को कई फायदे भी मिले.
- सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब रेलवे को केंद्र सरकार को सालाना डिविडेंड नहीं देना पड़ता.
- इससे रेलवे के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और आधुनिकीकरण के लिए ज्यादा पैसा बचने लगा.
अब एक बार फिर रेलवे बजट चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह है सीनियर सिटीजन को मिलने वाली संभावित राहत. अगर सरकार बजट 2026 में इस छूट को बहाल करने का ऐलान करती है, तो यह बुजुर्ग यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी. अब सबकी नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब संसद में बजट पेश किया जाएगा. तभी साफ होगा कि क्या सरकार वरिष्ठ नागरिकों की इस लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है या उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा.
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