Delhi Book Fair: कौन हैं 'किताब वाली आंटी' के नाम से मशहूर संजना तिवारी? जानें उनकी अनूठी कहानी

Kitab Wali Aunty Story: Delhi Book Fair में 'किताब वाली आंटी' के नाम से मशहूर संजना तिवारी इन दिनों चर्चा में हैं. बिहार के सीवान से दिल्ली तक का उनका सफर, पेड़ के नीचे लगी छोटी किताबों की दुकान और साहित्य से उनका गहरा रिश्ता लोगों को प्रेरित कर रहा है. जानिए उनकी अनूठी कहानी.

Delhi Book Fair
दिल्ली पुस्तक मेला में किताब वाली आंटी की हो रही खूब चर्चा
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान खूब सुर्खियां में बना हुआ है. इसके पीछे की वजह कुछ और नहीं बल्कि विश्व पुस्तक मेला है, जहां सुबह से लेकर शाम तक लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ रहता है. यहां पर किताबी प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है और लोग अपने पसंद के लेखक से साइन कि हुई पुस्तक लेने के लिए भी काफी जोश में दिख रहे  है. इन्हीं बड़े-बड़े राइटर्स और चमकदार स्टॉल्स के बीच एक छोटे से बुक स्टॉल की सादगी लोगों को अपनी ओर खींच रही है. यह स्टॉल किसी और का नहीं बल्कि 'किताब वाली आंटी' के नाम से फेमस संजना तिवारी का है, जिन्होंने किताबों को ही अपनी जिंदगी बना ली है. आइए विस्तार से जानते हैं कौन हैं यह महिला और लोग इन्हें 'किताब वाली आंटी' क्यों कहते है.

लोगों का ध्यान खींच रही सादगी

दिल्ली पुस्तक मेले में एक ओर लोग जहां अलग-अलग तरह की किताबें और ऑफर्स दे रहे हैं, वहीं संजना तिवारी का स्टॉल अपनी सादगी के कारण चर्चा में बन गया है. संजना ने अपने स्टॉल में सामान्य लाइटिंग के साथ किताबें रख रखी है और यही वजह है कि लोग वहां पहुंच रहे है. बताया जा रहा है कि यहां आने वाले पाठक सिर्फ किताब ही नहीं खरीद रहें बल्कि वर्षों का अनुभव और आत्मीयता भी महसूस कर रहे है.

कौन हैं संजना तिवारी?

संजना तिवारी जो 'किताब वाली आंटी' के नाम से फेमस है, मुख्य रूप से बिहार के सीवान जिले की रहने वाली है. संजना शादी के बाद से दिल्ली से रह रही है और पिछले करीब 25 साल से दिल्ली के मंडी हाउस में एक पेड़ के नीचे हिंदी साहित्य की दुकान सजाती है. संजना तिवारी की दुकान लोगों के लिए एक पहचान सी बन चुकी है. यहां थिएटर कलाकार से लेकर लेखक तक साहित्य से जुड़ी किताबें लेने के लिए आते है. वहीं संजना तिवारी आज एक पेड़ की नीचे से शुरुआत कर विश्व पुस्तक मेले में पहुंच चुकी है.

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संजना की लाइफ-जर्नी और किताबों से जुड़ाव

संजना की जब शादी हुई तब वे बस हाईस्कूल पास थी. शादी के बाद किसी ने नहीं सोचा था कि वे आग इस मुकाम पर पहुंचेगी. शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखा और मास्टर्स तक की पढ़ाई की. उनका यह सफर अपने आप में ही एक कहानी है. 

संजना तिवारी उर्फ किताब वाली आंटी के फैमिली की बात करें तो वह काफी संपन्न परिवार से आती है. संजना के पति एक रिटायर्ड पत्रकार और लेखक है. वहीं उनका बेटा डॉक्टर है, बेटी पीएचडी कर रही है और दामाद आईपीएस अधिकारी है. इतना संपन्न होने के बावजूद भी संजना आज खुद किताब की दुकान चलाती है. संजना का कहना है कि किताबें बेचना केवल उनका व्यापार नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा है और वह यह काम किसी मजबूरी ने नहीं बल्कि आत्म संतोष के लिए करती है.

किताबों ने बसाया नया परिवार

संजना तिवारी का कहना है कि उनका परिवार बस घर तक सीमित नहीं है क्योंकि किताबों ने एक नया परिवार बसा दिया है. उनके मुताबिक मंडी हाउस के थिएटर कलाकार, लेखक, कवि और पाठक सभी उनके लिए परिवार का एक हिस्सा ही है और इन्हीं लोगों ने प्यार से 'किताब वाली आंटी' कहकर बुलाना शुरू किया है. संजना ने बताया कि, जो कभी उनके दुकान से किताबें खरीदा करते थे आज IAS और IPS अधिकारी बनने के बाद भी आशीर्वाद लेने आते है.

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