MP की वो डरावनी रात: दतिया के जंगलों में विदेशी युवती से दरंदगी, अनकही दास्तां जिसने देश को किया शर्मसार

Datia gang rape case: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में विदेशी युवती के साथ हुई दरिंदगी की वो डरावनी रात आज भी लोगों को झकझोर देती है. स्विट्जरलैंड से भारत घूमने आए विदेशी जोड़े के साथ जंगल में सामूहिक दुष्कर्म की इस घटना ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार कर दिया था. जानिए पूरी अनकही दास्तां, कैसे मिले आरोपी और क्या आज भी उठते हैं सुरक्षा पर सवाल.

Datia gang rape case
दतिया गैग रेप केस
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मध्य प्रदेश का दतिया जिला एक ऐसी बर्बर घटना का गवाह बना था जिसने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार कर दिया था. स्विट्जरलैंड से भारत की संस्कृति देखने आए एक विदेशी जोड़े के लिए दतिया के घने जंगलों में बिताई गई वो रात किसी भयावह और बुरे सपने से कम नहीं थी. साइकिल से देश घूमने का सपना लेकर निकले इन पर्यटकों को क्या पता था कि यहां की कुछ इंसानी परछाइयां उनकी जिंदगी को कभी न भूलने वाला जख्म दे देंगी.

सुनसान हाईवे और टेंट की वो खौफनाक रात

घटना दतिया के झरिया गांव के पास की है, जहां घने जंगलों के बीच सुनसान हाईवे पर स्विट्जरलैंड की रहने वाली मैरी और उसका साथी जॉनसन रात बिताने के लिए टेंट लगाते हैं. रात के करीब 8:00 बजे अंधेरे का फायदा उठाकर 6 से 7 युवक हथियारों के साथ उनके टेंट को घेर लेते हैं. विरोध करने पर जॉनसन को बांध दिया जाता है और उससे ₹10,000 लूट लिए जाते हैं. लेकिन हैवानियत यहीं नहीं रुकती, उन दरिंदों ने जॉनसन के सामने ही मैरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया.

जब हाईवे पर फटे कपड़ों में मिली विदेशी लड़की

वारदात के बाद आरोपी लूटपाट कर फरार हो गए. फटे कपड़ों और लहूलुहान हालत में यह जोड़ा किसी तरह हाईवे पर पहुंचता है, जहां दो स्थानीय युवकों, दीपक और देवेंद्र ने उन्हें देखा. उनकी हालत इतनी खराब थी कि वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे. दोनों युवक उन्हें तुरंत सिविल लाइन थाने ले गए. थाने में भाषा की समस्या आई, जिसे सुलझाने के लिए एक कॉलेज प्रोफेसर को बुलाया गया. जब प्रोफेसर ने उनकी बात का अनुवाद किया, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई.

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एक काले पर्स ने खोला राज और मिला न्याय

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की. घटनास्थल के पास मिले एक काले पर्स और उसमें मौजूद दो वोटर आईडी कार्ड ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया. पकड़े गए सभी आरोपी 20 से 22 साल के युवक थे. कोर्ट में मैरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी गवाही दी और उस खौफनाक मंजर को बयां किया. दतिया की स्पेशल कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना के मात्र 4 महीने के भीतर, 20 जुलाई 2013 को सभी छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना दी.

सवाल जो आज भी बरकरार है

भले ही इस मामले के दोषियों को सजा मिल चुकी है और घटना को कई साल बीत गए हैं, लेकिन सवाल आज भी वही है कि क्या आज भी हमारे देश की सड़कें और जंगल किसी विदेशी महिला या आम नागरिक के लिए रात में पूरी तरह सुरक्षित हैं? क्या सिर्फ सजा देना ही व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी कर देता है?

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