नीतीश कुमार करेंगे अपनी पार्टी में बड़ा फेरबदल? जदयू में आरसीपी सिंह और निशांत की एंट्री को लेकर चल रही चर्चाओं की इनसाइड स्टोरी
JDU Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल होने के संकेत मिल रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू (JDU) को रिस्ट्रक्चर करने की तैयारी में हैं. मार्च में दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री और आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. जानिए बैठक कब होगी, किन नेताओं को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी और पार्टी के अंदर संभावित सियासी समीकरण.

बिहार में नीतीश कुमार आज यानी 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पर निकले हैं और वे इस दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में जाएंगे. लेकिन इसी बीच चर्चाएं तेज हो गई है कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी को रिस्ट्रक्चर करने वाले है? सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से ही इसकी प्लानिंग कर रहे हैं और अब मार्च में दिल्ली में होने जदयू की कार्यकारिणी बैठक में इस प्लान को एक्टिव किया जाएगा. फेरबदल के साथ-साथ यह भी कहा जा रहा है कि निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री होगी और आरसीपी सिंह भी पार्टी में वापस आ सकते हैं. साथ ही आरसीपी सिंह के पार्टी में वापसी की आने के बाद उनके पुराने झगड़े की भी चर्चाएं तेज हो गई है. आइए विस्तार से जानते हैं कब होगी बैठक, क्या हो सकता है फैसला, निशांत की राजनीतिक एंट्री की चर्चाएं क्यों हुई तेज और क्या है आरसीपी सिंह का पुराना झगड़ा.
जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में क्या होगा?
कहा जा रहा कि नीतीश कुमार अपनी इस यात्रा से बिहार के नब्ज को टटोलने का काम कर रहे है. इसी यात्रा के दौरान जनता से मिले फीडबैक और विकास कार्यों को देखते हुए पार्टी में बदलाव किए जा सकते है. अब सवाल आता है कि बैठक कब होगी? तो बैठक मार्च के आखिरी सप्ताह में होने की बात सामने आई है क्योंकि मार्च के पहले हफ्ते में होली है और उसके बाद सारी तैयारियां की जाएगी.
आपको बता दें कि दिल्ली में ही जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संजय झा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. अब कहा जा रहा है कि इस साल होने वाले बैठक में पार्टी को रिस्ट्रक्चर किया जाएगा, जिसमें की नीतीश कुमार अपने करीबी लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकते है. साथ ही निशांत के राजनीतिक एंट्री की बात पर यही मुहर लग सकती है.
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नीतीश कुमार को अपने लोगों की जरूरत?
राजनीतिक जानकारों और पार्टी के नेताओं का मानना है कि अब पार्टी को उत्तराधिकारी मिलना चाहिए. इसलिए ही नीतीश कुमार बदलाव करने के मूड में है. अब सवाल आता है कि नीतीश कुमार के अपने लोगों में किनका नाम है? तो इसमें एक नाम निशांत कुमार का है और दूसरा नाम जो खूब चर्चा में है वो आरसीपी सिंह का है. आपको बता दें कि आरसीपी और नीतीश कुमार का रिश्ता बहुत ही पुराना है. आरसीपी सिंह त्तर प्रदेश कैडर में आईएएस रहें है और जब नीतीश केंद्र में रेल मंत्री थे तब भी वे उनके साथ ही थे.
पार्टी से क्यों साइडलाइन हुए आरसीपी सिंह?
आरसीपी सिंह मोदी सरकार के पहले फेज में मंत्री बने और उस वक्त राज्यसभा से चुने गए. लेकिन जब राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हुआ तो उनका पार्टी के साथ मनमुटाव हुआ जिसके बाद वे पार्टी से बाहर निकाले गए और उनका मंत्री पद भी चला गया. फिर उन्होंने बीजेपी का दामन थामा लेकिन यहां भी लंबी पारी नहीं खेल पाए. आरसीपी सिंह बीजेपी में जिस तरीके का ओहदा चाहते थे वो उन्हें मिला तो फिर उन्होंने जन सुराज ज्वाइन कर लिया. हालांकि इस बीच उन्होंने अपनी पार्टी भी बनाई, पूरे बिहार में यात्रा भी की लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ.
आरसीपी सिंह की वापसी की चर्चा क्यों?
अब एक सवाल आता है कि अचानक से आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की चर्चाएं क्यों तेज हो गई है? तो इस सवाल का जवाब है आरसीपी सिंह का दिया एक बयान. बीते दिनों बिहार में एक दही-चूड़ा के भोज में पहुंचे आरसीपी ने कहा कि, मैं नीतीश बाबू के साथ 24-25 साल तक रहा हूं. उन्होंने आगे यह भी कहा कि नीतीश बाबू और हम एक ही है और हम उनको जीतना जानते हैं और वह हमको जीतना जानते हैं, शायद ही किसी को पता होगा. जदयू जॉइन करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह वक्त बताएगा. अब जब पार्टी के रिस्ट्रक्चर की बात हो रहीं तो कहा जा रहा कि आरसीपी सिंह की जदयू में जल्द वापसी होगी और नीतीश कुमार उन्हें बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकते हैं.
मनीष वर्मा की भी हो रही चर्चा?
अगर आपने देखा होगा कि चुनाव के वक्त और पार्टी के लगभग हर फैसले में एक शख्स काफी एक्टिव दिखा. ये कोई और नहीं बल्कि मनीष वर्मा है जो लगातार पर्दे के पीछे रहकर जदयू के लिए काम कर रहे है. कहा जाता है कि चुनाव बिहार विधानसभा का जो चुनाव हुआ था उसमें प्रबंधन का पूरा जिम्मा मनीष वर्मा के कंधों पर था जिसे उन्होंने बखूबी निभाया भी. इसलिए नीतीश कुमार मनीष वर्मा को भी जिम्मेदारी सौंप सकते है.
निशांत की राजनीतिक एंट्री कैसे होगी?
निशांत की राजनीतिक एंट्री को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहा है कि भले ही वे नीतीश कुमार के बेटे है लेकिन उनकी राजनीतिक एंट्री कैसी होगी और उन्हें क्या पद मिलेगा? तो पार्टी सूत्रों के मुताबिक जदयू निशांत कुमार के लिए उनकी विरासत के मुताबिक ही पद चाहती है ताकि कार्यकर्ताओं को भी न्याय मिल सकें. वहीं यह भी कहा जा रहा कि पार्टी में उनकी एंट्री के बाद दो पदों पर चर्चा है.
पहला: राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाना.
दूसरा: पार्टी का महासचिव बनाकर संगठन की बारिकियों से रूबरू कराना और पूरे बिहार का दौरा कराना.
आरसीपी सिंह के पुरान झगड़े की क्यों हो रही चर्चा?
अब जब आरसीपी सिंह के वापसी की बात हो रही है तो उनके पुराने झगड़े की भी चर्चा हो रही है. तो बात उस वक्त की है जब आरसीपी सिंह मंत्री बनाए जा रहे थे तब ललन सिंह से वे आमने-सामने हो गए थे. दरअसल उस वक्त कहा जा रहा था कि जेडीयू के कोटे से दो मंत्री बनाए जाएंगे. तब आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और वे मंत्री बन गए और ललन सिंह नहीं बन पाए. लेकिन फिर पार्टी की कमान ललन सिंह के हाथों में आई और फिर जिस तरह से आरसीपी पार्टी से साइडलाइन हुए थे यह सभी ने देखा ही था.
लेकिन अब अगर नीतीश कुमार फिर से पार्टी को रिस्ट्रक्चर करते हैं और वापस आरसीपी सिंह को जेडीयू के अंदर कोई कमान दे देते हैं तो तय मानिए कि एक और फ्रंट पर फिर झगड़ा शुरू होगा जिसमें फिर पार्टी की टॉप पोजीशन पर होल्ड की बात की जाएगी. हालांकि यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा की क्या होगा.










