अंकिता भंडारी केस में उत्तराखंड पुलिस ने VIP के नाम का किया खुलासा? बताया क्या हुआ था उस रात

Ankita Bhandari Murder Case: अंकिता भंडारी केस में एसआईटी के सदस्य ने जांच की पूरी इनसाइड स्टोरी साझा की है. क्या वाकई सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई थी? आखिर वह कौन 'वीआईपी' था जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर खूब हुई? पुलिस ने पांच दिनों की गुत्थी कैसे सुलझाई, इसकी पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें.

Ankita Bhandari Murder Case
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Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता हत्याकांड में जांच टीम (SIT) के सदस्य और तत्कालीन ASP ने शेखर सुयाल ने मामले की पूरी कड़ियों को जोड़ते हुए शनिवार को इस केस में अहम जानकारी साझा की है. बता दें कि 18 सितंबर 2022 को हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था. अधिकारी के मुताबिक अंकिता के गायब होने के बाद आरोपियों ने इसे गुमशुदगी का मोड़ देने की कोशिश की थी. उन्होंने पटवारी चौकी में शिकायत दर्ज कराई और अंकिता के दोस्त पुष्पदीप को भी गुमराह करने का प्रयास किया ताकि सारा शक उसके ऊपर चला जाए.

जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों ने जानबूझकर ऐसा सीन क्रिएट किया जिससे लगे कि अंकिता रात को वापस आई थी और सुबह गायब हुई. वे अंकिता के स्टाफ और परिवार को यह यकीन दिलाना चाहते थे कि वह 15-16 सितंबर को आए अपने एक मित्र के साथ गई है. हालांकि, अंकिता के दोस्त पुष्पदीप और सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष नेगी के सहयोग से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले.

एविडेंस नष्ट होने के आरोपों पर पुलिस का जवाब

सोशल मीडिया पर बार-बार यह आरोप लगे कि सबूतों को नष्ट किया गया. इस पर एसआईटी सदस्य ने स्पष्ट किया कि 22 सितंबर को केस पुलिस को मिलते ही रिसॉर्ट के कमरे को सील कर दिया गया था. अगले दिन सुबह श्रीनगर से आई एफएसएल टीम ने पूरी वीडियोग्राफी की और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए. पुलिस का दावा है कि इन साक्ष्यों को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने जांच को सही दिशा में माना.

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क्या था उस रहस्यमयी 'वीआईपी' का सच?

अंकिता की चैटिंग में जिस 'वीआईपी' को एक्स्ट्रा सर्विस देने का दबाव बनाया जा रहा था, उसे लेकर पुलिस ने गहराई से जांच की. पुलिस के अनुसार, अंकिता के दोस्त पुष्पदीप ने जिस हुलिए का जिक्र किया था, उसकी पहचान धर्मेंद्र उर्फ प्रधान के रूप में हुई. वह व्यक्ति नोएडा का रहने वाला था और वहां जमीन की तलाश में आया था. वह रिसॉर्ट में केवल दो-तीन घंटे रुका था. पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं की गई है.

यहां देखें पुलिस ने क्या क्या बताया?

कोर्ट का फैसला और एसआईटी की दलील

एसआईटी का कहना है कि उन्होंने डंप डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) और रिसॉर्ट के स्टाफ के बयानों के आधार पर एक मजबूत केस तैयार किया. रिसॉर्ट के कर्मचारियों ने भी कोर्ट में पुलिस की थ्योरी का समर्थन किया. इसी का नतीजा है कि ट्रायल कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई. पुलिस का कहना है कि पूरी जांच पारदर्शी रही और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव साक्ष्य जुटाए गए

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